Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for Chapter 2: Theory Base of Accounting.
लेखांकन के सिद्धांत वे नियम हैं जिनका पालन सभी लेखाकार (accountants) वित्तीय लेनदेन (financial transactions) को रिकॉर्ड करते समय करते हैं। इन्हें सामान्यतः स्वीकृत लेखांकन सिद्धांत (GAAP - Generally Accepted Accounting Principles) कहा जाता है।
"Business को owner से अलग माना जाता है।"
Example: अगर owner ने business में ₹1,00,000 निवेश किए हैं, तो यह business के लिए एक liability (दायित्व) होगी।
केवल वे लेनदेन रिकॉर्ड किए जाते हैं जिन्हें money में express किया जा सके। जैसे employee का morale (मनोबल) financial statements में नहीं दिखता।
इस अवधारणा के अनुसार, यह माना जाता है कि business भविष्य में indefinite period तक चलता रहेगा। इसीलिए fixed assets को उनकी original cost पर रिकॉर्ड किया जाता है।
Business के indefinite life को छोटे-छोटे periods (आमतौर पर 1 वर्ष) में divide करके financial statements तैयार किए जाते हैं। भारत में financial year 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।
Assets को उनकी acquisition cost पर रिकॉर्ड किया जाता है। जैसे - अगर एक machine ₹5 लाख में खरीदी गई है, तो balance sheet में यह ₹5 लाख पर ही दिखेगी, भले ही market value ₹6 लाख हो।
हर transaction के दो पहलू होते हैं:
graph LR
A[Transaction] --> B[Debit]
A --> C[Credit]
Revenue को तब recognize किया जाता है जब goods बेच दिए जाते हैं या service provide कर दी जाती है, न कि जब cash प्राप्त होता है।
एक accounting period की सही profit/loss calculate करने के लिए, उस period की सभी incomes को related expenses के साथ match किया जाता है।
Financial statements में business से related सभी महत्वपूर्ण जानकारी disclose की जानी चाहिए।
Accounting policies को year-to-year consistent रखा जाना चाहिए। जैसे - अगर एक बार straight line method से depreciation calculate की गई है, तो अगले साल भी वही method use करना चाहिए।
"Possible losses के लिए provision बनाओ, लेकिन anticipated profits को न दिखाओ।" इसीलिए closing stock को cost या net realizable value में से जो कम हो, उस पर value किया जाता है।
| आधार (Basis) | नकद आधार (Cash Basis) | उपार्जन आधार (Accrual Basis) |
|---|---|---|
| परिभाषा | केवल cash receipts/payments को रिकॉर्ड किया जाता है | Income को जब earn किया जाता है और expenses को जब incur किया जाता है |
| Profit/Loss | सही picture नहीं देता | सही picture देता है |
| Companies Act | मान्यता प्राप्त नहीं | मान्यता प्राप्त |
ICAI (Institute of Chartered Accountants of India) द्वारा जारी किए गए नियम जो financial statements की presentation और disclosure को standardize करते हैं।
एक comprehensive indirect tax जिसने भारत में कई अन्य taxes को replace किया है। यह multi-stage और destination-based tax है।
| English Term | हिंदी अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| GAAP | सामान्यतः स्वीकृत लेखांकन सिद्धांत | Following GAAP ensures uniformity |
| Accrual | उपार्जन | Recording income when earned, not when received |
| Conservatism | रूढ़िवादिता | Valuing closing stock at lower of cost or NRV |
| Entity | इकाई | Treating business and owner as separate |
| संकल्पना (Concept) | मूल सिद्धांत (Core Principle) | व्यावहारिक लेखांकन उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यावसायिक इकाई (Business Entity) | व्यवसाय और उसके स्वामी का अस्तित्व पृथक होता है | स्वामी द्वारा व्यापार में लगाई गई पूँजी को व्यापार का दायित्व (Liability) माना जाता है। |
| मुद्रा मापन (Money Measurement) | केवल वे लेन-देन दर्ज होते हैं जिन्हें मुद्रा में मापा जा सके | कर्मचारियों की ईमानदारी या प्रबंधकीय कौशल को खातों में दर्ज नहीं किया जाता। |
| सतत व्यापार (Going Concern) | व्यवसाय अनिश्चित काल तक निरंतर चलता रहेगा | संपत्तियों को उनके बाजार मूल्य के बजाय ऐतिहासिक लागत पर मूल्यह्रास घटाकर दिखाया जाता है। |
| लेखांकन अवधि (Accounting Period) | अनवरत जीवन को 1 वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में विभाजित करना | वार्षिक लाभ-हानि खाता और स्थिति विवरण (Balance Sheet) तैयार करना। |
| लागत संकल्पना (Cost Concept) | संपत्ति को उसके क्रय मूल्य (Historical Cost) पर दर्ज किया जाता है | ₹10 लाख में खरीदी गई भूमि का बाजार मूल्य ₹20 लाख होने पर भी पुस्तकों में ₹10 लाख ही रहेगा। |
| द्विपक्षीय संकल्पना (Dual Aspect) | प्रत्येक लेन-देन के दो पक्ष (Debit & Credit) होते हैं | $\text{Assets} = \text{Liabilities} + \text{Capital}$ |
| उपार्जन संकल्पना (Accrual Concept) | आय और व्यय उसी अवधि में दर्ज होते हैं जब वे अर्जित या देय होते हैं | अदत्त व्यय (Outstanding Expenses) और उपार्जित आय (Accrued Income) का समायोजन। |
| रूढ़िवादिता सिद्धांत (Prudence / Conservatism) | सभी संभावित हानियों का प्रावधान करें, किंतु अप्रत्याशित लाभों को दर्ज न करें | संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान (Provision for Doubtful Debts) बनाना। |
| बिंदु | भारतीय लेखा मानक (AS / Ind AS) | अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रतिवेदन मानक (IFRS) |
|---|---|---|
| प्रवर्तक | इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) | अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानक बोर्ड (IASB) |
| लागू होना | भारत की सूचीबद्ध एवं बड़ी कंपनियों पर अनिवार्य | विश्व के 140 से अधिक देशों में मान्य |
| उद्देश्य | वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय कंपनियों के खातों को तुलनीय बनाना | वित्तीय विवरणों में वैश्विक एकरूपता और पारदर्शिता |
प्रश्न 1: रूढ़िवादिता सिद्धांत (Prudence Concept) से आप क्या समझते हैं? स्टॉक का मूल्यांकन किस मूल्य पर किया जाता है? उत्तर: रूढ़िवादिता सिद्धांत के अनुसार, एक लेखाकार को भविष्य की सभी संभावित हानियों के लिए अग्रिम प्रावधान करना चाहिए, किंतु जब तक लाभ वास्तव में प्राप्त न हो जाए, तब तक उसे दर्ज नहीं करना चाहिए। इसी सिद्धांत के कारण अंतिम स्टॉक (Closing Stock) का मूल्यांकन लागत मूल्य अथवा बाजार मूल्य, जो दोनों में से कम हो (Cost or Net Realisable Value, whichever is lower) पर किया जाता है।