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1. परिचय

संसार की प्रत्येक वस्तु, चाहे वह एक छोटी सुई हो या एक विशाल पर्वत, सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी है। इन सूक्ष्म कणों को वैज्ञानिक भाषा में परमाणु (Atom) और अणु (Molecule) कहते हैं। प्राचीन भारतीय ऋषियों ने भी अपने वेदों और दर्शन ग्रंथों में पदार्थ को अत्यंत सूक्ष्म कणों (परमाणु) से बना बताया था। आधुनिक युग में जॉन डाल्टन ने परमाणुवाद को एक वैज्ञानिक सिद्धांत का रूप दिया। इस अध्याय में हम द्रव्यमान संरक्षण के नियम, स्थिर अनुपात के नियम, डाल्टन के परमाणु सिद्धांत, परमाणु द्रव्यमान, अणु, आयन तथा रासायनिक सूत्रों का अध्ययन करेंगे।

रसायन विज्ञान में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि किसी रासायनिक अभिक्रिया में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं। वैज्ञानिकों ने सदियों के अवलोकन के बाद दो मूलभूत नियमों की खोज की — द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) तथा स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportion)। इन नियमों ने यह स्थापित किया कि रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न तो नष्ट होता है और न ही बनता है, तथा किसी यौगिक में तत्वों का अनुपात सदैव निश्चित रहता है। इन्हीं नियमों के आधार पर डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत प्रतिपादित किया।

परमाणुओं और अणुओं को समझना आवश्यक है क्योंकि रासायनिक अभिक्रियाएँ वास्तव में इन्हीं सूक्ष्म कणों के बीच होने वाली प्रक्रियाएँ हैं। किसी भी रासायनिक अभिक्रिया को संतुलित समीकरण के रूप में लिखने के लिए हमें परमाणुओं की संख्या तथा द्रव्यमान को संतुलित रखना पड़ता है। इस अध्याय में हम सीखेंगे कि रासायनिक सूत्र कैसे लिखे जाते हैं, अणु का द्रव्यमान कैसे ज्ञात करते हैं तथा मोल की अवधारणा क्या है। ये सभी ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा में प्रथम सोपान हैं।

2. द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass)

फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंत्वां लवाज़िए (Antoine Lavoisier) ने 1789 में यह नियम प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार — "किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन होता है और न ही विनाश होता है; अभिक्रिया से पहले अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, अभिक्रिया के बाद बने उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।"

उदाहरण के लिए, यदि हम सोडियम कार्बोनेट के विलयन को कैल्शियम क्लोराइड के विलयन के साथ एक बंद बर्तन में मिलाते हैं, तो कैल्शियम कार्बोनेट (सफेद अवक्षेप) तथा सोडियम क्लोराइड बनता है। बर्तन का कुल द्रव्यमान अभिक्रिया से पहले और बाद में समान रहता है। इस प्रयोग से द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि होती है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अभिक्रिया को बंद बर्तन में करने पर ही सही परिणाम मिलता है, क्योंकि खुले बर्तन में बनी गैसें बाहर निकलकर द्रव्यमान को कम कर सकती हैं।

द्रव्यमान संरक्षण के नियम को गणितीय रूप में निम्न प्रकार लिखा जा सकता है:

Σ अभिकारकों का द्रव्यमान = Σ उत्पादों का द्रव्यमान

इस नियम का महत्व यह है कि इसके आधार पर ही रासायनिक समीकरणों को संतुलित किया जाता है। किसी भी संतुलित रासायनिक समीकरण में दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है।

3. स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportion)

इस नियम के अनुसार — "किसी रासायनिक यौगिक में तत्व सदैव निश्चित द्रव्यमान अनुपात में उपस्थित होते हैं।" इसे निश्चित अनुपात का नियम भी कहते हैं। जल (H₂O) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 1:8 होता है, चाहे जल किसी भी स्रोत से प्राप्त हो। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में कार्बन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 3:8 होता है।

अमोनिया (NH₃) में नाइट्रोजन और हाइड्रोजन का द्रव्यमान अनुपात 14:3 रहता है। यदि किसी यौगिक में तत्वों का अनुपात निश्चित नहीं होगा, तो वह यौगिक नहीं, बल्कि मिश्रण होगा। यही नियम तत्वों तथा यौगिकों में अंतर स्पष्ट करता है। स्थिर अनुपात का नियम यह दर्शाता है कि प्रत्येक यौगिक का एक निश्चित सूत्र होता है, जिसमें तत्वों की संख्या निश्चित रहती है।

4. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton's Atomic Theory)

जॉन डाल्टन (John Dalton) ने सन् 1808 में परमाणु सिद्धांत प्रतिपादित किया, जो आधुनिक रसायन विज्ञान की नींव है। इस सिद्धांत की मुख्य अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है, जिन्हें परमाणु (Atom) कहते हैं।
  2. परमाणु अविभाज्य (Indivisible) कण हैं, जिन्हें रासायनिक अभिक्रिया में न तो निर्मित किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  3. किसी तत्व के सभी परमाणु समान होते हैं, जिनका द्रव्यमान तथा गुणधर्म एक जैसे होते हैं।
  4. विभिन्न तत्वों के परमाणुओं का द्रव्यमान तथा गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं।
  5. यौगिकों का निर्माण दो या अधिक तत्वों के परमाणुओं के एक सरल पूर्ण संख्या अनुपात में संयोग से होता है।
  6. रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं का केवल पुनर्व्यवस्थापन होता है; परमाणु सदैव संरक्षित रहते हैं।

डाल्टन का सिद्धांत बहुत हद तक सही सिद्ध हुआ, परंतु बाद में यह ज्ञात हुआ कि परमाणु वास्तव में विभाज्य होते हैं (उनमें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन होते हैं), तथा किसी तत्व के परमाणु समान नहीं होते (समस्थानिक होते हैं)। फिर भी यह सिद्धांत रसायन विज्ञान में क्रांति लाने वाला सिद्ध हुआ।

5. परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) और परमाणु द्रव्यमान इकाई

परमाणु अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, इसलिए उनका द्रव्यमान सामान्य इकाइयों में व्यक्त करना कठिन है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक विशेष इकाई बनाई, जिसे परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic Mass Unit, u) कहते हैं। एक परमाणु द्रव्यमान इकाई कार्बन-12 (C-12) परमाणु के द्रव्यमान का बारहवाँ भाग है। गणितीय रूप में:

1 u = (1/12) × C-12 परमाणु का द्रव्यमान

व्यवहार में 1 u ≈ 1.6605 × 10^-27 kg होता है। किसी तत्व के परमाणु का द्रव्यमान जो इस इकाई में व्यक्त किया जाता है, उसे परमाणु द्रव्यमान कहते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान 1 u, ऑक्सीजन का 16 u, नाइट्रोजन का 14 u, कार्बन का 12 u तथा सल्फर का 32 u होता है। परमाणु द्रव्यमान प्रायः पूर्णांक में होता है। परमाणु त्रिज्या को नैनोमीटर (1 nm = 10^-9 m) में मापा जाता है।

अणु द्रव्यमान (Molecular Mass)

किसी अणु का द्रव्यमान उसमें उपस्थित सभी परमाणुओं के द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है। इसे अणु द्रव्यमान कहते हैं। उदाहरण के लिए, जल (H₂O) का अणु द्रव्यमान = 2 × 1 + 16 = 18 u; कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का अणु द्रव्यमान = 12 + 2 × 16 = 44 u; नाइट्रोजन गैस (N₂) का अणु द्रव्यमान = 2 × 14 = 28 u।

मोल अवधारणा (Mole Concept)

मोल रसायन विज्ञान की आधारभूत इकाई है। एक मोल किसी पदार्थ की उतनी मात्रा है, जितनी में कणों (परमाणुओं, अणुओं या आयनों) की संख्या आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10^23) के बराबर होती है। इसलिए:

1 मोल = 6.022 × 10^23 कण

किसी तत्व का ग्राम-परमाणु द्रव्यमान (Gram Atomic Mass) वह द्रव्यमान है, जो उस तत्व के एक मोल परमाणुओं में होता है। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन का ग्राम-परमाणु द्रव्यमान 16 ग्राम है। किसी यौगिक का ग्राम-अणु द्रव्यमान (Gram Molecular Mass) उस यौगिक के एक मोल अणुओं का द्रव्यमान है। जल का ग्राम-अणु द्रव्यमान 18 ग्राम है, अर्थात 1 मोल जल का द्रव्यमान 18 ग्राम होता है। किसी तत्व का ग्राम-परमाणु द्रव्यमान या ग्राम-अणु द्रव्यमान के बराबर द्रव्यमान को एक मोल कहा जाता है।

मोलों की संख्या की गणना

मोलों की संख्या = (पदार्थ का द्रव्यमान ÷ ग्राम-अणु द्रव्यमान)

उदाहरण के लिए, 90 ग्राम जल में मोलों की संख्या = 90 ÷ 18 = 5 मोल।

6. अणु (Molecule)

अणु किसी पदार्थ का सबसे छोटा कण है, जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है तथा पदार्थ के सभी गुणधर्मों को प्रदर्शित करता है। अणु दो या अधिक परमाणुओं के रासायनिक संयोग से बनता है। अणु दो प्रकार के होते हैं — तत्वों के अणु और यौगिकों के अणु

तत्वों के अणु: किसी तत्व के अणु में उसी तत्व के एक या अधिक परमाणु होते हैं। ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन जैसी गैसों के अणु में दो परमाणु होते हैं (O₂, N₂, H₂), इसलिए उन्हें द्विपरमाणुक (Diatomic) अणु कहते हैं। ओज़ोन (O₃) में तीन परमाणु होते हैं (त्रिपरमाणुक), जबकि फॉस्फोरस (P₄) तथा सल्फर (S₈) में क्रमशः चार और आठ परमाणु होते हैं। उत्कृष्ट गैसें (हीलियम, नियॉन, आर्गन) एकपरमाणुक (Monoatomic) होती हैं।

यौगिकों के अणु: किसी यौगिक के अणु में विभिन्न तत्वों के परमाणु निश्चित अनुपात में उपस्थित होते हैं। जल का अणु (H₂O) दो हाइड्रोजन तथा एक ऑक्सीजन परमाणु से बना होता है। अमोनिया का अणु (NH₃) एक नाइट्रोजन तथा तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से बना होता है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का अणु एक कार्बन तथा दो ऑक्सीजन परमाणुओं से बना होता है।

आयन (Ion)

विद्युत आवेशित कण को आयन (Ion) कहते हैं। धनावेशित आयन को धनायन (Cation) कहते हैं, जैसे Na⁺, K⁺, Ca²⁺, Al³⁺, NH₄⁺। ऋणावेशित आयन को ऋणायन (Anion) कहते हैं, जैसे Cl⁻, O²⁻, SO₄²⁻, CO₃²⁻। किसी यौगिक में धनायन तथा ऋणायन दोनों उपस्थित होते हैं तथा कुल आवेश शून्य रहता है। सोडियम क्लोराइड (NaCl) में Na⁺ और Cl⁻ आयन होते हैं। जल में सोडियम क्लोराइड घुलने पर Na⁺ और Cl⁻ आयनों में विभक्त हो जाता है, इसलिए नमक का जलीय विलयन विद्युत का चालक होता है।

7. रासायनिक सूत्र (Chemical Formula)

किसी यौगिक का रासायनिक सूत्र उस यौगिक में उपस्थित तत्वों के प्रतीकों तथा उनकी संख्या को दर्शाता है। रासायनिक सूत्र लिखने के लिए सर्वप्रथम तत्वों के प्रतीकों (Symbols) का ज्ञान आवश्यक है। जे. जे. बर्ज़ेलियस ने तत्वों के प्रतीकों के लिए प्रस्ताव रखा कि प्रत्येक तत्व के लिए उसके अंग्रेज़ी या लैटिन नाम का एक या दो अक्षर का प्रतीक प्रयुक्त हो। कुछ प्रतीक तत्व के अंग्रेज़ी नाम से, कुछ लैटिन नाम से लिए गए हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O), कार्बन (C), नाइट्रोजन (N) अंग्रेज़ी से हैं, जबकि सोडियम (Na, Natrium), पोटैशियम (K, Kalium), लोहा (Fe, Ferrum), ताँबा (Cu, Cuprum), सोना (Au, Aurum), चाँदी (Ag, Argentum) लैटिन नामों से लिए गए हैं।

रासायनिक सूत्र लिखने की विधि

रासायनिक सूत्र लिखने के लिए दो चरण अपनाए जाते हैं:

  1. पहले धनावेशित कण (धनायन) को बाईं ओर तथा ऋणावेशित कण (ऋणायन) को दाईं ओर लिखा जाता है।
  2. फिर आवेशों को क्रॉस करके (criss-cross विधि) सूत्र लिखा जाता है, ताकि यौगिक में कुल आवेश शून्य हो जाए।

उदाहरण — सोडियम क्लोराइड: Na⁺ और Cl⁻, क्रॉस विधि से NaCl। कैल्शियम क्लोराइड: Ca²⁺ और Cl⁻, क्रॉस विधि से CaCl₂। मैग्नीशियम ऑक्साइड: Mg²⁺ और O²⁻, क्रॉस विधि से MgO। एल्युमिनियम ऑक्साइड: Al³⁺ और O²⁻, क्रॉस विधि से Al₂O₃। कैल्शियम कार्बोनेट: Ca²⁺ और CO₃²⁻, क्रॉस विधि से CaCO₃।

कुछ महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र

यौगिक सूत्र यौगिक सूत्र
जल H₂O सोडियम क्लोराइड NaCl
कार्बन डाइऑक्साइड CO₂ कैल्शियम क्लोराइड CaCl₂
अमोनिया NH₃ मैग्नीशियम ऑक्साइड MgO
मीथेन CH₄ एल्युमिनियम ऑक्साइड Al₂O₃
सल्फ्यूरिक अम्ल H₂SO₄ नाइट्रिक अम्ल HNO₃

रासायनिक अभिक्रिया को संतुलित करना

किसी रासायनिक अभिक्रिया को संतुलित करने के लिए अभिक्रिया के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान करनी पड़ती है। यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार आवश्यक है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के संयोग से जल बनने की अभिक्रिया:

H₂ + O₂ → H₂O (असंतुलित)

संतुलित समीकरण: 2H₂ + O₂ → 2H₂O

इस संतुलित समीकरण में दोनों ओर हाइड्रोजन के 4 परमाणु तथा ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं। द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार अभिक्रिया से पहले और बाद का कुल द्रव्यमान समान रहता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: कुछ तत्वों के प्रतीक एवं परमाणु द्रव्यमान

तत्व प्रतीक परमाणु द्रव्यमान (u)
हाइड्रोजन H 1
कार्बन C 12
नाइट्रोजन N 14
ऑक्सीजन O 16
सोडियम Na 23
मैग्नीशियम Mg 24
एल्युमिनियम Al 27
सल्फर S 32
पोटैशियम K 39
कैल्शियम Ca 40

तालिका 2: अणु द्रव्यमान की गणना

यौगिक गणना अणु द्रव्यमान (u)
जल (H₂O) 2×1 + 16 18
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) 12 + 2×16 44
अमोनिया (NH₃) 14 + 3×1 17
सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) 2×1 + 32 + 4×16 98
नाइट्रोजन गैस (N₂) 2×14 28

तालिका 3: मूलभूत नियम

नियम प्रतिपादक मूल कथन
द्रव्यमान संरक्षण लवाज़िए द्रव्यमान न तो बनता है, न नष्ट होता है
स्थिर अनुपात प्राउस्ट यौगिक में तत्व निश्चित अनुपात में
परमाणु सिद्धांत डाल्टन परमाणु अविभाज्य कण

माइंड मैप

graph TD A["परमाणु एवं अणु"] --> B["मूलभूत नियम"] B --> B1["द्रव्यमान संरक्षण का नियम"] B --> B2["स्थिर अनुपात का नियम"] A --> C["डाल्टन का परमाणु सिद्धांत"] C --> C1["परमाणु अविभाज्य"] C --> C2["यौगिकों का निर्माण"] A --> D["परमाणु द्रव्यमान"] D --> D1["इकाई: u (1/12 C-12)"] D --> D2["मोल = 6.022 × 10^23 कण"] A --> E["अणु"] E --> E1["तत्वों के अणु (O2, N2)"] E --> E2["यौगिकों के अणु (H2O, CO2)"] A --> F["आयन"] F --> F1["धनायन (Na+)"] F --> F2["ऋणायन (Cl-)"] A --> G["रासायनिक सूत्र"] G --> G1["प्रतीक + क्रॉस विधि"] G --> G2["समीकरण संतुलन"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: द्रव्यमान संरक्षण का नियम

द्रव्यमान संरक्षण का नियम अभिकारक सोडियम कार्बोनेट + कैल्शियम क्लोराइड कुल द्रव्यमान = m₁ उत्पाद कैल्शियम कार्बोनेट + सोडियम क्लोराइड कुल द्रव्यमान = m₂ m₁ = m₂ बंद बर्तन में अभिक्रिया करने पर द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है उदाहरण: 5.3 g सोडियम कार्बोनेट + 6.0 g कैल्शियम क्लोराइड → 5.6 g कैल्शियम कार्बोनेट + 5.7 g सोडियम क्लोराइड कुल अभिकारक = 11.3 g | कुल उत्पाद = 11.3 g | द्रव्यमान संरक्षित 2H₂ + O₂ → 2H₂O (संतुलित समीकरण) स्वर्ण नियम अभिकारकों का कुल द्रव्यमान सदैव उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।

आरेख 2: अणु निर्माण एवं रासायनिक सूत्र

परमाणुओं का अणु निर्माण जल (H₂O) H H O 2×1 + 16 = 18 u कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) C O O 12 + 2×16 = 44 u क्रॉस विधि से सूत्र लेखन Al³⁺ (धनायन) + O²⁻ (ऋणायन) क्रॉस → Al₂O₃ Ca²⁺ (धनायन) + CO₃²⁻ (ऋणायन) क्रॉस → CaCO₃ 1 u = (1/12) × C-12 परमाणु का द्रव्यमान | 1 मोल = 6.022 × 10^23 कण मोलों की संख्या = पदार्थ का द्रव्यमान ÷ ग्राम-अणु द्रव्यमान उदाहरण: 90 g जल = 5 मोल जल Golden Rule अणु द्रव्यमान = सभी परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग; एक मोल में 6.022 × 10^23 कण होते हैं।

सामान्य गलतियाँ

  1. द्रव्यमान संरक्षण का परीक्षण: इस नियम को सिद्ध करने के लिए अभिक्रिया बंद बर्तन में करनी चाहिए; खुले बर्तन में गैस के बाहर निकलने से द्रव्यमान कम लग सकता है।
  2. स्थिर अनुपात का मिश्रण से भ्रम: यह नियम केवल यौगिकों पर लागू होता है; मिश्रण में घटकों का अनुपात कोई भी हो सकता है।
  3. परमाणु द्रव्यमान इकाई: 1 u, C-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12 भाग है, न कि हाइड्रोजन के द्रव्यमान का (जो प्राचीन परिभाषा थी)।
  4. आयनों के आवेश में अंतर: धनायन (Na⁺, Ca²⁺) और ऋणायन (Cl⁻, SO₄²⁻) के आवेशों को याद रखें; सूत्र लेखन में आवेश की संख्या का क्रॉस लगाया जाता है, चिह्न का नहीं।
  5. मोल और ग्राम-अणु द्रव्यमान: एक मोल का अर्थ द्रव्यमान नहीं, बल्कि कणों की संख्या (6.022 × 10^23) है; ग्राम-अणु द्रव्यमान के बराबर द्रव्यमान ही एक मोल होता है।
  6. समीकरण संतुलन: समीकरण को संतुलित करते समय केवल गुणांक बदले जाते हैं, रासायनिक सूत्र नहीं बदले जाते; अन्यथा यौगिक की पहचान बदल जाएगी।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. द्रव्यमान संरक्षण तथा स्थिर अनुपात के नियमों को एक उदाहरण सहित सिद्ध करने का अभ्यास करें; यह वर्णनात्मक प्रश्नों में नियमित रूप से पूछा जाता है।
  2. डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के सभी अभिगृहीत (postulates) तथा बाद में मिली त्रुटियाँ (परमाणु की विभाज्यता) दोनों याद रखें।
  3. प्रतीक तालिका तथा अणु द्रव्यमान की गणना के संख्यात्मक प्रश्नों का अभ्यास करें; सभी गणनाओं में चरणों को स्पष्ट लिखें।
  4. क्रॉस विधि से कम से कम पाँच सूत्र (NaCl, CaCl₂, MgO, Al₂O₃, CaCO₃) लिखने का अभ्यास करें।
  5. मोल अवधारणा के प्रश्नों में आवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10^23) तथा सूत्र याद रखें; उत्तर में इकाई (मोल) अवश्य लिखें।
  6. रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की विधि (परमाणुओं की संख्या संतुलित करना) के तीन-चार उदाहरण हल करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि संसार की समस्त वस्तुएँ परमाणुओं और अणुओं से मिलकर बनी हैं। द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहता है कि रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न तो बनता है और न ही नष्ट होता है, जबकि स्थिर अनुपात का नियम कहता है कि किसी यौगिक में तत्व निश्चित द्रव्यमान अनुपात में होते हैं। इन नियमों के आधार पर डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत दिया। परमाणु द्रव्यमान को परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) में मापा जाता है, जहाँ 1 u कार्बन-12 के द्रव्यमान का बारहवाँ भाग है। अणु किसी पदार्थ का सबसे छोटा स्वतंत्र कण है, जो तत्वों के अणु या यौगिकों के अणु हो सकते हैं। आयन विद्युत आवेशित कण हैं, जो धनायन या ऋणायन होते हैं। रासायनिक सूत्र तत्वों के प्रतीकों तथा क्रॉस विधि द्वारा लिखे जाते हैं, और रासायनिक समीकरणों को द्रव्यमान संरक्षण के अनुसार संतुलित किया जाता है। मोल अवधारणा हमें पदार्थ की मात्रा को कणों की संख्या से जोड़ती है। यह ज्ञान रसायन विज्ञान की आधारशिला है और आगे के अध्ययन (परमाणु संरचना, रासायनिक अभिक्रियाएँ, स्टॉइकियोमेट्री) के लिए अत्यंत आवश्यक है।