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1. परिचय

हमारे पैरों के नीचे जमीन क्यों रहती है? ऊपर फेंकी गई गेंद वापस क्यों आती है? आकाश में तारे तथा ग्रह क्यों नहीं गिरते? इन सभी प्रश्नों का उत्तर एक ही बल में निहित है — गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force)। आइज़क न्यूटन ने सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का प्रतिपादन किया। इस अध्याय में हम गुरुत्वाकर्षण के नियम, गुरुत्वीय त्वरण, मुक्त पतन, द्रव्यमान और भार, तथा उत्प्लावन एवं आर्किमिडीज़ सिद्धांत का अध्ययन करेंगे।

न्यूटन ने सेब के पेड़ से गिरते सेब को देखकर गुरुत्वाकर्षण के बारे में सोचा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वही बल जो सेब को पृथ्वी की ओर गिराता है, चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा में रखता है तथा ग्रहों को सूर्य की परिक्रमा में रखता है। इस प्रकार गुरुत्वाकर्षण बल ब्रह्मांड के हर दो कणों के बीच कार्य करता है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है।

पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल ही हमें पृथ्वी से बाँधे रखता है। जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में पृथ्वी की ओर गिरती है, तो इस गति को मुक्त पतन (Free Fall) कहते हैं। इस गिरावट में वस्तु का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण (g) कहलाता है, जिसका मान लगभग 9.8 m/s² होता है। वस्तु के द्रव्यमान को हम तोलते हैं, परंतु वस्तु का भार (Weight) वह बल है जिससे पृथ्वी उसे खींचती है। द्रव्यमान और भार में अंतर भी इस अध्याय का महत्वपूर्ण विषय है। इस अध्याय के अंत में हम तरलों में तैरने तथा डूबने के कारणों (उत्प्लावन) को भी समझेंगे।

2. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Universal Law of Gravitation)

न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार — "ब्रह्मांड में प्रत्येक कण अपने आप से प्रत्येक अन्य कण को आकर्षित करता है, तथा यह आकर्षण बल दोनों कणों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।"

मान लीजिए दो वस्तुओं के द्रव्यमान m₁ और m₂ हैं तथा उनके केंद्रों के बीच की दूरी r है। तब उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल F होगा:

F = G × (m₁ × m₂) ÷ r²

जहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (Universal Gravitational Constant) है, जिसका मान 6.67 × 10^-11 N·m²/kg² है। G का मान दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान तथा उनके बीच की दूरी पर निर्भर नहीं करता; यह ब्रह्मांड में सर्वत्र समान होता है, इसलिए इसे 'सार्वत्रिक' स्थिरांक कहते हैं।

इस नियम की कुछ विशेषताएँ हैं — गुरुत्वाकर्षण बल दो वस्तुओं के बीच हमेशा आकर्षण बल होता है; यह उनके बीच के माध्यम पर निर्भर नहीं करता; तथा यह न्यूटन के गति के तृतीय नियम का पालन करता है — अर्थात दोनों वस्तुएँ एक-दूसरे को समान बल से आकर्षित करती हैं।

गुरुत्वाकर्षण बल का महत्व

  1. यह बल पृथ्वी तथा अन्य खगोलीय पिंडों को आपस में बाँधे रखता है।
  2. यह चंद्रमा को पृथ्वी की तथा ग्रहों को सूर्य की परिक्रमा में रखता है।
  3. यह पृथ्वी पर वस्तुओं को गिरने का कारण बनता है।
  4. यह ज्वार-भाटा (Tides) उत्पन्न करता है, क्योंकि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण समुद्र के जल को अपनी ओर खींचता है।
  5. यह वायुमंडल को पृथ्वी से बाँधे रखता है।

3. मुक्त पतन और गुरुत्वीय त्वरण (Free Fall and Acceleration due to Gravity)

जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में पृथ्वी की ओर गिरती है, तो उसकी गति को मुक्त पतन (Free Fall) कहते हैं। मुक्त पतन में वस्तु का त्वरण उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। इस त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) कहते हैं, जिसे g से व्यक्त किया जाता है।

गुरुत्वीय त्वरण का मान g = G × M ÷ R² होता है, जहाँ M पृथ्वी का द्रव्यमान तथा R पृथ्वी की त्रिज्या है। पृथ्वी की सतह पर g का मान लगभग 9.8 m/s² होता है। g का मान पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर जाने पर घटता है तथा पृथ्वी की सतह से अधिक गहराई में भी घटता है। विषुवत रेखा पर g का मान ध्रुवों की तुलना में कम होता है, क्योंकि पृथ्वी विषुवत रेखा पर अधिक चौड़ी (उत्तल) है।

मुक्त पतन में गिरती वस्तु की गति गति के समीकरणों द्वारा वर्णित की जा सकती है, जहाँ त्वरण a = g होता है:

v = u + gt

s = ut + (1/2)gt²

v² = u² + 2gs

जब वस्तु विराम से (u = 0) गिरती है, तो:

v = gt तथा s = (1/2)gt²

उदाहरण: यदि कोई वस्तु विराम से गिरती है, तो 2 सेकंड में उसका वेग v = gt = 9.8 × 2 = 19.6 m/s तथा गिरी दूरी s = (1/2) × 9.8 × 4 = 19.6 m होगी।

4. द्रव्यमान और भार (Mass and Weight)

द्रव्यमान (Mass): किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की कुल मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं। द्रव्यमान एक अदिश राशि है, जो सदैव स्थिर रहता है। द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम (kg) है। द्रव्यमान वस्तु का आंतरिक गुण है तथा स्थान के अनुसार नहीं बदलता।

भार (Weight): किसी वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उस वस्तु का भार कहलाता है। भार एक सदिश राशि है, जिसकी दिशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है। भार = द्रव्यमान × गुरुत्वीय त्वरण।

W = m × g

भार की SI इकाई न्यूटन (N) है। भार स्थान के अनुसार बदलता है, क्योंकि g का मान स्थान के अनुसार बदलता है। चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के g का लगभग छठा भाग है, इसलिए चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी के भार का लगभग छठा भाग होता है। परंतु द्रव्यमान स्थान से स्वतंत्र होने के कारण चंद्रमा पर भी वही रहता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु का पृथ्वी पर द्रव्यमान 60 kg है, तो उसका भार 60 × 9.8 = 588 N होगा। चंद्रमा पर उसका द्रव्यमान 60 kg ही रहेगा, परंतु भार 60 × (9.8/6) ≈ 98 N होगा।

5. उत्प्लावन (Buoyancy)

जब किसी वस्तु को किसी द्रव में रखा जाता है, तो द्रव वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है, जिसे उत्प्लावन बल (Buoyant Force) कहते हैं। यह बल वस्तु के भार के विरुद्ध कार्य करता है। उत्प्लावन बल का परिमाण द्रव के घनत्व तथा वस्तु के आयतन पर निर्भर करता है।

उत्प्लावन (Buoyancy): किसी द्रव या गैस द्वारा उसमें डूबी हुई वस्तु पर ऊपर की ओर लगाया जाने वाला बल उत्प्लावन कहलाता है।

घनत्व (Density): किसी पदार्थ के प्रति इकाई आयतन में उपस्थित द्रव्यमान को उस पदार्थ का घनत्व कहते हैं। घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन। घनत्व की SI इकाई kg/m³ है।

वस्तु के द्रव में तैरने या डूबने का निर्णय वस्तु के घनत्व तथा द्रव के घनत्व की तुलना पर होता है:

  1. यदि वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से कम है, तो वस्तु तैरती है।
  2. यदि वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से अधिक है, तो वस्तु डूबती है।
  3. यदि दोनों के घनत्व बराबर हैं, तो वस्तु संतुलित अवस्था में रहती है।

6. आर्किमिडीज़ का सिद्धांत (Archimedes' Principle)

आर्किमिडीज़ के सिद्धांत के अनुसार — "जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्णतः या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह उतना ही उत्प्लावन बल अनुभव करती है, जितना उसके द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है।"

आर्किमिडीज़ के सिद्धांत का प्रयोग:

  1. इंजीनियरिंग में जलयानों तथा पनडुब्बियों की सुरक्षा तथा डिज़ाइन में।
  2. घनत्व तथा सापेक्ष घनत्व निर्धारित करने में।
  3. लैक्टोमीटर तथा हाइड्रोमीटर के सिद्धांत में, जिनसे क्रमशः दूध तथा द्रवों की शुद्धता ज्ञात होती है।
  4. सोने की शुद्धता की जाँच में।

सापेक्ष घनत्व (Relative Density): किसी पदार्थ का घनत्व तथा जल के घनत्व का अनुपात सापेक्ष घनत्व कहलाता है। सापेक्ष घनत्व = पदार्थ का घनत्व ÷ जल का घनत्व। सापेक्ष घनत्व की कोई इकाई नहीं होती (यह विमाहीन राशि है)। शुद्ध सोने का सापेक्ष घनत्व 19.3 होता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: द्रव्यमान बनाम भार

गुण द्रव्यमान भार
परिभाषा पदार्थ की मात्रा गुरुत्वाकर्षण बल
राशि का प्रकार अदिश सदिश
SI इकाई किलोग्राम (kg) न्यूटन (N)
स्थान पर निर्भरता निर्भर नहीं निर्भर करता है
मापन उपकरण तराजू स्प्रिंग बैलेंस

तालिका 2: मुक्त पतन के समीकरण

समीकरण संबंध
v = u + gt वेग
s = ut + (1/2)gt² विस्थापन
v² = u² + 2gs वेग-विस्थापन

तालिका 3: तैरना बनाम डूबना

स्थिति परिणाम
वस्तु का घनत्व < द्रव का घनत्व तैरती है
वस्तु का घनत्व > द्रव का घनत्व डूबती है
घनत्व बराबर संतुलित

माइंड मैप

graph TD A["गुरुत्वाकर्षण"] --> B["सार्वत्रिक नियम"] B --> B1["F = G×m1×m2/r²"] A --> C["मुक्त पतन"] C --> C1["गुरुत्वीय त्वरण g = 9.8 m/s²"] A --> D["द्रव्यमान व भार"] D --> D1["द्रव्यमान: kg, स्थिर"] D --> D2["भार = mg, न्यूटन"] A --> E["उत्प्लावन"] E --> E1["आर्किमिडीज़ सिद्धांत"] E --> E2["घनत्व व सापेक्ष घनत्व"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: गुरुत्वाकर्षण बल

दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल वस्तु m₁ वस्तु m₂ F F दूरी r F = G × (m₁ × m₂) / r² G = 6.67 × 10^-11 N·m²/kg² (सार्वत्रिक स्थिरांक) बल दोनों द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती, दूरी² के व्युत्क्रमानुपाती स्वर्ण नियम गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है; दूरी दुगुनी → बल चौथाई।

आरेख 2: मुक्त पतन एवं भार

मुक्त पतन एवं द्रव्यमान-भार गेंद g = 9.8 m/s² वेग बढ़ता जाता है भार W = m × g इकाई: न्यूटन चंद्रमा पर भार = 1/6 द्रव्यमान इकाई: kg, स्थिर पदार्थ की मात्रा मुक्त पतन के समीकरण: v = u + gt | s = ut + ½gt² | v² = u² + 2gs उदाहरण: 60 kg वस्तु का पृथ्वी पर भार = 60 × 9.8 = 588 N उत्प्लावन: आर्किमिडीज़ सिद्धांत — विस्थापित द्रव के भार के बराबर उत्प्लावन Golden Rule द्रव्यमान स्थान से स्वतंत्र रहता है, परंतु भार g के मान पर निर्भर करता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. द्रव्यमान और भार को एक मानना: द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है (kg), जबकि भार गुरुत्वाकर्षण बल है (N)। भार स्थान के साथ बदलता है, द्रव्यमान नहीं।
  2. G और g में भ्रम: G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है (6.67 × 10^-11), जो सर्वत्र समान है; g गुरुत्वीय त्वरण है (9.8 m/s²), जो स्थान के अनुसार बदलता है। दोनों अलग राशियाँ हैं।
  3. दूरी का वर्ग: गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। दूरी दुगुनी करने पर बल चौथाई हो जाता है, आधा नहीं।
  4. मुक्त पतन में द्रव्यमान: मुक्त पतन में सभी वस्तुएँ (भारी या हल्की) समान त्वरण g से गिरती हैं, बशर्ते वायु का प्रतिरोध न हो। भारी वस्तु जल्दी गिरती है, यह गलत धारणा है।
  5. तैरना-डूबना: तैरना घनत्व पर निर्भर करता है, द्रव्यमान पर नहीं। इस्पात की नाव (कुल घनत्व कम) तैरती है, जबकि इस्पात की गेंद डूबती है।
  6. आर्किमिडीज़ सिद्धांत: उत्प्लावन बल विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है, वस्तु के पूरे भार के नहीं।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम का कथन, सूत्र (F = Gm₁m₂/r²) तथा G का मान याद रखें; व्युत्पत्ति में m₁, m₂, r की परिभाषा स्पष्ट करें।
  2. द्रव्यमान और भार की तुलनात्मक तालिका लिखने का अभ्यास करें; संख्यात्मक प्रश्नों में W = mg का प्रयोग करें।
  3. मुक्त पतन के समीकरणों के संख्यात्मक प्रश्न हल करें (u = 0 पर v = gt, s = ½gt²)।
  4. चंद्रमा पर भार = पृथ्वी के भार का 1/6 वाला तथ्य तथा उसका कारण (g का मान 1/6) याद रखें।
  5. आर्किमिडीज़ सिद्धांत का कथन, उत्प्लावन, घनत्व तथा सापेक्ष घनत्व की अवधारणा उदाहरण सहित लिखने का अभ्यास करें।
  6. g के परिवर्तन (ऊँचाई, गहराई, विषुवत रेखा बनाम ध्रुव) के कारकों को याद रखें; यह लघु उत्तरीय प्रश्नों में पूछा जाता है।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार ब्रह्मांड के हर दो कणों के बीच आकर्षण बल कार्य करता है, जो दोनों द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस बल का मान G × m₁m₂/r² होता है। मुक्त पतन में वस्तुएँ समान त्वरण g (लगभग 9.8 m/s²) से गिरती हैं। द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है (kg), जबकि भार गुरुत्वाकर्षण बल है (W = mg), जो स्थान के अनुसार बदलता है। चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी के भार का लगभग छठा भाग होता है। द्रवों में रखी वस्तुओं पर उत्प्लावन बल कार्य करता है, और आर्किमिडीज़ सिद्धांत के अनुसार यह बल विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है। वस्तु का तैरना या डूबना उसके घनत्व तथा द्रव के घनत्व की तुलना पर निर्भर करता है। यह ज्ञान जहाज निर्माण, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर, लैक्टोमीटर तथा खगोलीय गति के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।