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1. परिचय

हम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के पदार्थों का उपयोग करते हैं, जैसे दूध, जल, चीनी, नमक, वायु, मिट्टी, धातु आदि। क्या ये सभी पदार्थ शुद्ध हैं? इसका उत्तर है — नहीं। अधिकांश पदार्थ, जिन्हें हम रोज़मर्रा में उपयोग करते हैं, शुद्ध नहीं होते; वे दो या अधिक पदार्थों के मिश्रण होते हैं। उदाहरण के लिए, दूध में जल, वसा, प्रोटीन तथा लैक्टोज़ पाए जाते हैं; वायु में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प होते हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि शुद्ध पदार्थ किसे कहते हैं, तत्व, यौगिक और मिश्रण में क्या अंतर है तथा विभिन्न मिश्रणों को उनके घटकों में अलग करने की विधियाँ कौन-कौन सी हैं।

रसायन विज्ञान की दृष्टि से शुद्ध पदार्थ (Pure Substance) वह पदार्थ है, जो केवल एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है। उदाहरण के लिए, जल केवल जल के अणुओं से बना होता है। किसी भी शुद्ध पदार्थ के रासायनिक गुणधर्म उसके हर नमूने में समान होते हैं। शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के होते हैं — तत्व (Element) और यौगिक (Compound)। तत्व एक ही प्रकार के परमाणुओं से बने होते हैं, जैसे सोना, लोहा, ऑक्सीजन। यौगिक दो या अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनते हैं, जैसे जल (H₂O), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), सोडियम क्लोराइड (NaCl)।

इसके विपरीत मिश्रण (Mixture) दो या अधिक पदार्थों का ऐसा संयोजन है, जिसमें पदार्थ भौतिक रूप से मिले होते हैं तथा किसी भी अनुपात में मिलाए जा सकते हैं। मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है। मिश्रण दो प्रकार के होते हैं — समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) और विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)। जिस मिश्रण में घटक पूरी तरह एकसार मिले हों तथा उनके कण नग्न आँखों से न दिखें, वह समांगी मिश्रण होता है, जैसे चीनी का जलीय विलयन, नमक का विलयन। जिस मिश्रण में घटक स्पष्ट रूप से अलग-अलग दिखते हैं, वह विषमांगी मिश्रण होता है, जैसे चावल और दाल, रेत और लोहे की छीलन। इस अध्याय में हम इन सभी अवधारणाओं को विस्तार से तथा विलयन के प्रकार, सांद्रता और पृथक्करण की विधियों का अध्ययन करेंगे।

2. शुद्ध पदार्थ और मिश्रण में अंतर

शुद्ध पदार्थ और मिश्रण के बीच मुख्य अंतर उनकी संरचना तथा गुणधर्मों में होता है। शुद्ध पदार्थ में घटकों का अनुपात निश्चित होता है, जबकि मिश्रण में घटकों का अनुपात परिवर्तनशील होता है। शुद्ध पदार्थ के भौतिक गुणधर्म (गलनांक, क्वथनांक, घनत्व) निश्चित होते हैं, जबकि मिश्रण के भौतिक गुणधर्म उसकी संरचना पर निर्भर करते हैं।

तत्व (Element)

तत्व वह शुद्ध पदार्थ है, जो केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है। तत्व को किसी सरल पदार्थ में विभाजित नहीं किया जा सकता। वर्तमान में लगभग 118 तत्व ज्ञात हैं। इन्हें धातु, अधातु और उपधातु में वर्गीकृत किया जा सकता है। सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा धातु हैं; ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन, सल्फर अधातु हैं। धातुओं में चमक, आघातवर्धनीयता (पीटकर पत्तर बनाना) तथा विद्युत का चालन जैसे गुण पाए जाते हैं, जबकि अधातुओं में ये गुण सामान्यतः नहीं पाए जाते।

यौगिक (Compound)

यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है, जो दो या अधिक तत्वों के निश्चित द्रव्यमान अनुपात में रासायनिक संयोग से बनता है। यौगिक के गुणधर्म उसके घटक तत्वों के गुणधर्मों से भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है तथा क्लोरीन (Cl) जहरीली गैस है, परंतु इन दोनों के संयोग से बनने वाला सोडियम क्लोराइड (NaCl) सामान्य नमक है, जो भोजन में उपयोग होता है। जल (H₂O) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 1:8 रहता है। यौगिक को रासायनिक विधियों से ही उसके घटकों में विभाजित किया जा सकता है।

मिश्रण (Mixture)

मिश्रण में दो या अधिक पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं तथा वे भौतिक रूप से मिश्रित होते हैं। मिश्रण के घटक अपने मूल गुणधर्म बनाए रखते हैं। मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों (छानना, वाष्पीकरण, आसवन आदि) द्वारा अलग किया जा सकता है। रेत और लोहे की छीलन का मिश्रण चुंबक की सहायता से अलग किया जा सकता है; रेत और नमक के मिश्रण को जल में घोलकर छानने तथा वाष्पीकरण द्वारा अलग किया जा सकता है।

तत्व, यौगिक और मिश्रण में अंतर की तालिका

गुण तत्व यौगिक मिश्रण
घटक एक प्रकार के परमाणु दो या अधिक तत्व निश्चित अनुपात में दो या अधिक पदार्थ किसी भी अनुपात में
पृथक्करण संभव नहीं रासायनिक विधि से भौतिक विधि से
गुणधर्म निश्चित घटकों से भिन्न घटकों के गुणधर्म बने रहते हैं
उदाहरण Au, Fe, O₂ H₂O, CO₂, NaCl वायु, दूध, मिट्टी

3. विलयन (Solution)

विलयन दो या अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है। विलयन के दो घटक होते हैं — विलेय (Solute) और विलायक (Solvent)। जो पदार्थ कम मात्रा में विलीन होता है, उसे विलेय कहते हैं, तथा जो पदार्थ अधिक मात्रा में होता है और जिसमें विलेय विलीन होता है, उसे विलायक कहते हैं। उदाहरण के लिए, चीनी के जलीय विलयन में चीनी विलेय है और जल विलायक। विलायक केवल जल ही नहीं होता; तेल, एल्कोहल, स्पिरिट आदि भी विलायक हो सकते हैं।

विलयन के प्रकार

विलेय कणों के आकार के आधार पर विलयन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

  1. सत्य विलयन (True Solution): जिस विलयन में विलेय कणों का आकार 10^-9 मीटर से कम होता है, वह सत्य विलयन कहलाता है। सत्य विलयन में कण नग्न आँखों से नहीं दिखते तथा प्रकाश किरण को बिखेरते नहीं हैं। यह पारदर्शी होता है। उदाहरण — नमक का जलीय विलयन, चीनी का विलयन। सत्य विलयन के कण बैठते नहीं हैं (स्थायी होते हैं)।

  2. कोलाइडी विलयन (Colloidal Solution): जिस विलयन में विलेय कणों का आकार 10^-9 से 10^-7 मीटर के बीच होता है, उसे कोलाइडी विलयन या कोलाइड कहते हैं। कोलाइड के कणों को अति सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। कोलाइडी विलयन प्रकाश किरण को बिखेरता है, जिसे टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) कहते हैं। कोलाइड के कण पर्याप्त समय तक बैठते नहीं हैं। उदाहरण — दूध, कोहरा, जेली, स्याही। दूध में मौजूद प्रोटीन कण प्रकाश को बिखेरते हैं, इसीलिए दूध टिंडल प्रभाव दिखाता है।

  3. निलंबन (Suspension): जिस विलयन में विलेय कणों का आकार 10^-7 मीटर से अधिक होता है तथा जो नग्न आँखों से दिखते हैं, उसे निलंबन कहते हैं। निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है। इसके कण कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं (अस्थायी होते हैं) तथा प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करते। उदाहरण — मिट्टी और पानी का मिश्रण, चाक का पाउडर और पानी।

सत्य विलयन, कोलाइड और निलंबन में अंतर

गुण सत्य विलयन कोलाइड निलंबन
कणों का आकार 10^-9 m से कम 10^-9 से 10^-7 m 10^-7 m से अधिक
कणों की दृश्यता नग्न आँखों से अदृश्य अति सूक्ष्मदर्शी से दृश्य नग्न आँखों से दृश्य
स्थायित्व स्थायी कुछ समय स्थायी अस्थायी (कण बैठते हैं)
टिंडल प्रभाव नहीं दिखाता दिखाता है नहीं दिखाता
प्रकार समांगी समांगी लगता है विषमांगी

4. विलयन की सांद्रता (Concentration of Solution)

किसी विलयन में विलेय की मात्रा को उस विलयन की सांद्रता (Concentration) कहते हैं। विलयन की सांद्रता को मापने के लिए सबसे सामान्य विधि द्रव्यमान प्रतिशत (Mass by Mass Percentage) है, जिसे निम्न सूत्र से निकाला जाता है:

सांद्रता (%) = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100

जहाँ विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान। उदाहरण के लिए, यदि 40 ग्राम नमक को 320 ग्राम जल में घोला जाए, तो विलयन का कुल द्रव्यमान 360 ग्राम होगा और सांद्रता = (40 ÷ 360) × 100 = 11.1% होगी। सांद्रता को आयतन प्रतिशत (Volume by Volume) के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ विलेय और विलायक दोनों के आयतन का उपयोग होता है। शराब में एल्कोहल की मात्रा इसी प्रकार आयतन प्रतिशत में व्यक्त की जाती है।

संतृप्त विलयन (Saturated Solution)

किसी विशिष्ट तापमान पर जब किसी विलायक में विलेय की अधिकतम संभव मात्रा विलीन हो जाती है और आगे और विलेय नहीं घुलता, तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं। यदि इस विलयन को ठंडा किया जाए या अधिक विलेय मिलाया जाए, तो अतिरिक्त विलेय नीचे बैठ जाता है। जिस विलयन में अभी और विलेय घुल सकता है, उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं। जब संतृप्त विलयन को ठंडा किया जाता है, तो कुछ विलेय कण स्फटिक (crystal) के रूप में अलग हो जाते हैं। इस विधि का उपयोग स्फटिकीकरण (Crystallization) कहलाता है।

5. मिश्रण को पृथक् करने की विधियाँ (Separating the Components of a Mixture)

मिश्रण के घटकों को अलग करने के लिए घटकों के भौतिक गुणधर्मों (कणों का आकार, घनत्व, क्वथनांक, चुंबकीय गुण, विलेयता आदि) में अंतर का उपयोग किया जाता है। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. हाथ से चुनना (Hand Picking): जब मिश्रण के घटक पर्याप्त बड़े हों और मात्रा कम हो, तो उन्हें हाथ से अलग किया जा सकता है। उदाहरण — चावल में से पत्थर अलग करना।

  2. छन्ना (Threshing): कटाई के बाद अनाज को भूसे से अलग करना। अनाज के पौधों को मारकर दाने अलग किए जाते हैं।

  3. निथारना (Winnowing): अनाज में हवा की सहायता से भूसे को अलग करना। हवा के झोंके से भूसे का हल्का कण उड़ जाता है।

  4. अपकेन्द्रीकरण (Sedimentation and Decantation): जब मिश्रण में भारी कण पानी में तली में बैठ जाते हैं, तो इसे अवसादन (Sedimentation) कहते हैं, तथा ऊपर के पानी को ध्यान से उड़ेल कर अलग करना निथारना (Decantation) कहलाता है। उदाहरण — गंदे पानी से मिट्टी अलग करना।

  5. निस्पंदन (Filtration): अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करने के लिए छानने की विधि उपयोग होती है। इस विधि में एक छिद्रयुक्त पदार्थ (फिल्टर पेपर) से होकर द्रव गुजरता है, परंतु ठोस कण रुक जाते हैं। उदाहरण — चाय को छलनी से छानकर पत्तियाँ अलग करना।

  6. वाष्पीकरण (Evaporation): जल में घुला नमक वाष्पीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है। विलयन को गरम करने पर जल वाष्पित हो जाता है और नमक बच जाता है। समुद्री जल से नमक इसी विधि से प्राप्त होता है।

  7. क्रिस्टलीकरण (Crystallization): वाष्पीकरण की भिन्नता, जिसमें शुद्ध ठोस क्रिस्टल रूप में प्राप्त होता है। नमक की अशुद्धियों को दूर करने तथा फिटकरी के क्रिस्टल बनाने में यह विधि उपयोग होती है। समुद्री जल से नमक प्राप्त करने में सबसे पहले अवसादन तथा निस्पंदन किया जाता है, फिर स्फटिकीकरण द्वारा शुद्ध नमक प्राप्त किया जाता है।

  8. आसवन (Distillation): जब किसी विलयन के दो घटकों के क्वथनांक में अंतर होता है, तो उन्हें आसवन द्वारा अलग किया जाता है। नमक और जल को आसवन द्वारा अलग किया जा सकता है। आसवन में विलयन को क्वथन तक गरम किया जाता है; वाष्प को ठंडा करके द्रव (आसुत) के रूप में संग्रहीत किया जाता है। दो अमिश्रणीय द्रवों (जैसे जल और तेल) को पृथक्कारी कीप (Separating Funnel) से अलग किया जाता है।

  9. विभिन्न तापमान पर आसवन (Fractional Distillation): जब मिश्रण के द्रवों के क्वथनांक बहुत निकट होते हैं, तो खंडीय आसवन (फ्रैक्शनल आसवन) का उपयोग होता है। कच्चे तेल से पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीज़ल आदि को खंडीय आसवन द्वारा अलग किया जाता है। वायु से ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और निष्क्रिय गैसों को भी इसी विधि से पृथक् किया जाता है।

  10. उच्च बनाने (Sublimation): जब मिश्रण में कोई घटक ऊर्ध्वपातन (ठोस से सीधे गैस) में समर्थ होता है, तो उसे इस विधि से अलग किया जाता है। रेत और कपूर के मिश्रण से कपूर ऊर्ध्वपातन द्वारा अलग किया जाता है; कपूर के कण सीधे ठोस से गैस में बदल कर ठंडी सतह पर क्रिस्टल बना देते हैं।

  11. क्रोमैटोग्राफी (Chromatography): जब मिश्रण के घटकों को अलग करना कठिन हो और उनके गुणों में अत्यधिक समानता हो, तो क्रोमैटोग्राफी का उपयोग होता है। यह विधि विभिन्न घटकों के अधिशोषण तथा वाहक द्रव में घुलने की क्षमता में अंतर पर आधारित होती है। श्वेत पेपर पर काली स्याही के धब्बे को विलायक के संपर्क में रखने पर रंग घटकों में विभक्त हो जाते हैं। वनस्पति रंगों, रंगद्रव्यों तथा वर्णकों के पृथक्करण में यह विधि उपयोगी है।

  12. चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic Separation): जब मिश्रण में कोई घटक चुंबकीय होता है (जैसे लोहे की छीलन), तो चुंबक की सहायता से उसे अलग किया जाता है। सल्फर और लोहे की छीलन के मिश्रण से लोहा चुंबक द्वारा अलग किया जा सकता है।

6. रासायनिक अभिक्रिया और यौगिक (Physical and Chemical Changes)

पदार्थ में होने वाले परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं — भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन। भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का केवल आकार, अवस्था या रूप बदलता है, परंतु रासायनिक संरचना वही रहती है। इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता तथा यह प्रायः उत्क्रमणीय होता है। उदाहरण — बर्फ का पिघलना, जल का वाष्पीकरण, कागज को मोड़ना। रासायनिक परिवर्तन में एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं तथा यह प्रायः अनुत्क्रमणीय होता है। उदाहरण — लोहे में जंग लगना, दूध का दही बनना, कागज का जलना, खाद्य पदार्थों का पचना। रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक (Reactants) नई स्थिर अवस्था में बदलते हैं, जिसे उत्पाद (Products) कहते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: तत्व, यौगिक और मिश्रण

वर्गीकरण परिभाषा उदाहरण
तत्व एक ही प्रकार के परमाणु Au, Fe, O₂
यौगिक दो या अधिक तत्व निश्चित अनुपात में H₂O, CO₂, NaCl
समांगी मिश्रण एकसार, घटक अदृश्य चीनी का विलयन
विषमांगी मिश्रण घटक स्पष्ट दिखते हैं रेत और नमक

तालिका 2: विलयन के प्रकार

प्रकार कणों का आकार टिंडल प्रभाव उदाहरण
सत्य विलयन 10^-9 m से कम नहीं नमक का विलयन
कोलाइड 10^-9 से 10^-7 m हाँ दूध, कोहरा
निलंबन 10^-7 m से अधिक नहीं मिट्टी-जल मिश्रण

तालिका 3: पृथक्करण की विधियाँ

विधि उपयोग का आधार उदाहरण
निस्पंदन कणों का आकार चाय में से पत्ती
वाष्पीकरण क्वथनांक में अंतर समुद्री जल से नमक
आसवन क्वथनांक में अंतर नमक-जल विलयन
स्फटिकीकरण संतृप्तता शुद्ध नमक के क्रिस्टल
उच्च बनाने ऊर्ध्वपातन क्षमता रेत में से कपूर
चुंबकीय पृथक्करण चुंबकीय गुण सल्फर-लोहा

माइंड मैप

graph TD A["पदार्थ"] --> B["शुद्ध पदार्थ"] A --> C["मिश्रण"] B --> B1["तत्व"] B --> B2["यौगिक"] C --> C1["समांगी मिश्रण"] C --> C2["विषमांगी मिश्रण"] C1 --> D["विलयन"] D --> D1["सत्य विलयन"] D --> D2["कोलाइड"] D --> D3["निलंबन"] A --> E["पृथक्करण की विधियाँ"] E --> E1["निस्पंदन, वाष्पीकरण"] E --> E2["आसवन, स्फटिकीकरण"] E --> E3["उच्च बनाने, क्रोमैटोग्राफी"] E --> E4["चुंबकीय पृथक्करण"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: पदार्थ का वर्गीकरण

पदार्थ का वर्गीकरण पदार्थ शुद्ध पदार्थ तत्व Au, Fe, O2 यौगिक H2O, CO2, NaCl मिश्रण समांगी मिश्रण चीनी का विलयन विषमांगी रेत व नमक विलयन: विलेय + विलायक | सांद्रता (%) = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100 सत्य विलयन | कोलाइड (टिंडल प्रभाव) | निलंबन (कण बैठते हैं) संतृप्त विलयन: किसी ताप पर अधिकतम विलेय घुला हो स्वर्ण नियम तत्व व यौगिक शुद्ध पदार्थ हैं; मिश्रण भौतिक विधियों से पृथक् किए जा सकते हैं।

आरेख 2: विलयन के प्रकार एवं पृथक्करण

विलयन के प्रकार सत्य विलयन कण आकार < 10^-9 m पारदर्शी, स्थायी, कोई टिंडल प्रभाव नहीं कोलाइड कण आकार 10^-9 से 10^-7 m टिंडल प्रभाव (दूध, कोहरा) निलंबन कण आकार > 10^-7 m कण बैठ जाते हैं (विषमांगी) पृथक्करण की विधियाँ निस्पंदन → वाष्पीकरण → आसवन → स्फटिकीकरण खंडीय आसवन (पेट्रोल) → उच्च बनाने (कपूर) → क्रोमैटोग्राफी (रंग) अपकेन्द्रीकरण (अवसादन + निथारना) | पृथक्कारी कीप (जल व तेल) Golden Rule सत्य विलयन पारदर्शी व स्थायी, कोलाइड टिंडल प्रभाव दिखाता है, निलंबन के कण बैठते हैं।

सामान्य गलतियाँ

  1. सभी मिश्रण अशुद्ध नहीं, सभी शुद्ध पदार्थ तत्व नहीं: शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के होते हैं — तत्व और यौगिक। छात्र प्रायः यौगिक को मिश्रण समझ लेते हैं, परंतु यौगिक में घटक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से बँधे होते हैं।
  2. विलेय और विलायक की पहचान: अधिक मात्रा वाला घटक हमेशा विलायक नहीं होता; यह सदैव संदर्भ पर निर्भर करता है। सामान्यतः विलेय कम मात्रा में तथा विलायक अधिक मात्रा में होता है।
  3. सांद्रता के सूत्र में हर: सांद्रता के सूत्र में हर में विलयन का द्रव्यमान आता है (विलेय + विलायक), न कि केवल विलायक का द्रव्यमान।
  4. आसवन और वाष्पीकरण में अंतर: वाष्पीकरण में विलायक उड़ जाता है और विलेय बचता है, जबकि आसवन में वाष्प को संघनित करके दोनों घटक प्राप्त होते हैं।
  5. ठोस में घुलनशीलता का तापमान पर प्रभाव: अधिकांश ठोसों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है, परंतु गैसों की विलेयता तापमान बढ़ने पर घटती है। यह विपरीत संबंध याद रखना चाहिए।
  6. मिश्रण को अलग करने की विधि का चयन: अमिश्रणीय द्रवों (जल-तेल) को पृथक्कारी कीप से अलग किया जाता है, आसवन से नहीं; आसवन मिश्रणीय द्रवों के लिए होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. तत्व, यौगिक और मिश्रण के बीच अंतर की तुलनात्मक तालिका याद करें, जो लघु उत्तरीय प्रश्नों का नियमित विषय है।
  2. सत्य विलयन, कोलाइड और निलंबन में कणों के आकार, टिंडल प्रभाव तथा स्थायित्व के आधार पर अंतर लिखने का अभ्यास करें।
  3. सांद्रता की गणना के संख्यात्मक प्रश्नों का अभ्यास करें; सूत्र को निर्देशित रूप से स्थानापन्न करें और उत्तर में इकाई (प्रतिशत) अवश्य लिखें।
  4. पृथक्करण की प्रत्येक विधि का आधार तथा एक उदाहरण याद रखें; कुछ विधियों (आसवन, स्फटिकीकरण, क्रोमैटोग्राफी) के लिए चित्र बनाने का अभ्यास करें।
  5. टिंडल प्रभाव को दैनिक जीवन (दूध, कोहरे में गाड़ी की हेडलाइट, धुएँ) से जोड़ें ताकि उदाहरण सहित उत्तर लिख सकें।
  6. संतृप्त विलयन, संतृप्तता तथा स्फटिकीकरण की अवधारणा को जोड़कर याद रखें; ये सभी एक ही श्रृंखला से जुड़े हैं।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि आस-पास उपस्थित अधिकांश पदार्थ शुद्ध नहीं होते; वे मिश्रण होते हैं। शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के होते हैं — तत्व और यौगिक। तत्व केवल एक प्रकार के परमाणुओं से बने होते हैं, जबकि यौगिक दो या अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनते हैं। मिश्रण में घटक किसी भी अनुपात में मिले होते हैं तथा उन्हें भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है। विलयन समांगी मिश्रण है, जिसमें विलेय और विलायक होते हैं; सत्य विलयन, कोलाइड और निलंबन विलयन के तीन प्रकार हैं। सांद्रता विलयन में विलेय की मात्रा को व्यक्त करती है। मिश्रण को पृथक् करने के लिए निस्पंदन, वाष्पीकरण, आसवन, स्फटिकीकरण, उच्च बनाने, क्रोमैटोग्राफी, चुंबकीय पृथक्करण आदि विधियाँ उपयोग की जाती हैं। इन विधियों का चयन घटकों के भौतिक गुणधर्मों में अंतर के आधार पर होता है। यह अध्याय रसायन विज्ञान की आधारशिला है, क्योंकि पदार्थों के शुद्धिकरण तथा वर्गीकरण के बिना कोई रासायनिक अध्ययन संभव नहीं है।