हमारे चारों ओर की समस्त चीज़ें निरंतर गति में हैं — पत्तियाँ हिल रही हैं, पक्षी उड़ रहे हैं, गाड़ियाँ चल रही हैं, तथा हमारी पृथ्वी स्वयं सूर्य की परिक्रमा कर रही है। भौतिकी में किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को गति (Motion) कहते हैं। गति सदैव सापेक्ष (Relative) होती है — अर्थात किसी वस्तु की गति को किसी संदर्भ बिंदु या अन्य वस्तु के सापेक्ष ही वर्णित किया जाता है। इस अध्याय में हम दूरी, विस्थापन, चाल, वेग, त्वरण तथा विभिन्न प्रकार की गति का अध्ययन करेंगे।
गति का अध्ययन करने के लिए हमें कुछ मूलभूत राशियों की आवश्यकता होती है। दूरी (Distance) किसी वस्तु द्वारा तय किए गए पथ की कुल लंबाई है, जो सदैव धनात्मक होती है। विस्थापन (Displacement) प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक की सबसे छोटी दूरी है, जो अदिश तथा सदिश दोनों हो सकता है। जब वस्तु सीधी रेखा में एक ही दिशा में चलती है, तभी दूरी और विस्थापन बराबर होते हैं; अन्यथा दूरी सदैव विस्थापन से अधिक या बराबर होती है।
गति का वर्णन करने में चाल (Speed) और वेग (Velocity) दो महत्वपूर्ण राशियाँ हैं। चाल वह दर है जिस पर दूरी तय होती है, जबकि वेग वह दर है जिस पर विस्थापन होता है। चाल एक अदिश राशि है तथा वेग एक सदिश राशि है। जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ बदलता है, तो उसे त्वरण (Acceleration) कहते हैं। इस अध्याय में हम इन सभी अवधारणाओं को सूत्रों तथा ग्राफ़ों की सहायता से विस्तार से समझेंगे।
कोई वस्तु कब गति में है और कब विराम में है, यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। किसी वस्तु की स्थिति समय के साथ बदलती है, तो वस्तु गति में होती है। यदि स्थिति नहीं बदलती, तो वस्तु विराम में होती है। परंतु यह विवरण सापेक्ष होता है। उदाहरण के लिए, चलती हुई बस में बैठा यात्री बस के सापेक्ष विराम में है, परंतु बस के बाहर खड़े व्यक्ति के सापेक्ष वह गति में है। अतः गति तथा विराम सापेक्ष अवधारणाएँ हैं। गति को मापने के लिए हमें एक संदर्भ बिंदु (Reference Point) तथा एक दिशा की आवश्यकता होती है।
दूरी (Distance): किसी गतिशील वस्तु द्वारा तय किए गए पथ की कुल लंबाई को दूरी कहते हैं। दूरी एक अदिश राशि है, जिसका केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं। दूरी सदैव धनात्मक होती है तथा इसमें वस्तु के पथ के प्रत्येक मोड़ की लंबाई सम्मिलित होती है।
विस्थापन (Displacement): किसी वस्तु की प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक की सबसे छोटी दूरी (सरल रेखीय दूरी) को विस्थापन कहते हैं। विस्थापन एक सदिश राशि है, जिसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं। विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति बिंदु A से बिंदु B तक 3 किमी तथा बिंदु B से बिंदु C तक 4 किमी एक सीधी रेखा में चलता है, तो उसकी कुल दूरी 7 किमी होगी, परंतु विस्थापन 7 किमी ही होगा (यदि सभी एक ही दिशा में हों)। यदि वह वापस बिंदु A पर लौट आए, तो दूरी 14 किमी परंतु विस्थापन शून्य होगा। किसी पूर्ण चक्कर के बाद विस्थापन शून्य हो सकता है, परंतु दूरी कभी शून्य नहीं होती।
दूरी सदैव विस्थापन से अधिक या बराबर होती है (Distance ≥ |Displacement|)। ये दोनों तभी बराबर होते हैं जब वस्तु सीधी रेखा में बिना दिशा बदले चलती है।
चाल (Speed): किसी वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी तथा लिए गए कुल समय के अनुपात को चाल कहते हैं।
चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय (v = d/t)
चाल की SI इकाई मीटर प्रति सेकंड (m/s) है। अन्य इकाइयाँ — किमी/घंटा, सेमी/सेकंड। 1 m/s = 3.6 km/h। चाल एक अदिश राशि है।
वेग (Velocity): प्रति इकाई समय में विस्थापन को वेग कहते हैं।
वेग = विस्थापन ÷ समय (v = s/t)
वेग एक सदिश राशि है, जिसमें परिमाण के साथ दिशा भी होती है। किसी वस्तु की चाल अधिक हो सकती है, परंतु वेग शून्य हो सकता है (जब वस्तु अपनी प्रारंभिक स्थिति में लौट आए)।
समय के साथ वेग में होने वाले परिवर्तन की दर को त्वरण (Acceleration) कहते हैं। त्वरण एक सदिश राशि है।
त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) ÷ लिया गया समय
a = (v − u) ÷ t
त्वरण की SI इकाई m/s² है। यदि वस्तु का वेग बढ़ता है, तो त्वरण धनात्मक होता है; यदि वेग घटता है, तो त्वरण ऋणात्मक होता है, जिसे मंदन (Retardation) कहते हैं। यदि वेग में परिवर्तन नहीं होता, तो त्वरण शून्य होता है।
उदाहरण: यदि कोई वस्तु विरामावस्था से प्रारंभ करके 5 सेकंड में 10 m/s का वेग प्राप्त करती है, तो त्वरण a = (10 − 0) ÷ 5 = 2 m/s² होगा।
जब कोई वस्तु एकसमान त्वरण से गति करती है, तो उसकी गति को निम्नलिखित तीन समीकरणों द्वारा वर्णित किया जा सकता है, जिन्हें गति के समीकरण कहते हैं:
1. v = u + at — प्रथम गति समीकरण (वेग का संबंध)
2. s = ut + (1/2)at² — द्वितीय गति समीकरण (स्थिति का संबंध)
3. v² = u² + 2as — तृतीय गति समीकरण (वेग-विस्थापन संबंध)
जहाँ u = प्रारंभिक वेग, v = अंतिम वेग, a = त्वरण, t = समय, s = विस्थापन।
उदाहरण: यदि कोई वस्तु विराम से (u = 0) 2 m/s² के त्वरण से 10 सेकंड चलती है, तो:
अंतिम वेग v = u + at = 0 + 2 × 10 = 20 m/s
विस्थापन s = ut + (1/2)at² = 0 + (1/2) × 2 × 100 = 100 m
गति को ग्राफ़ों द्वारा भी दर्शाया जा सकता है।
इस ग्राफ़ में समय को X-अक्ष पर तथा दूरी को Y-अक्ष पर दर्शाया जाता है। ग्राफ़ की ढाल (Slope) वस्तु की चाल को दर्शाती है। एकसमान गति में यह ग्राफ़ एक सरल रेखा (सीधी रेखा) होती है, जो बताती है कि वस्तु समान समय में समान दूरी तय करती है। असमान गति में यह ग्राफ़ वक्र होता है। विराम की अवस्था में यह ग्राफ़ समय अक्ष के समांतर एक क्षैतिज रेखा होती है। दूरी-समय ग्राफ़ की ढाल चाल के बराबर होती है।
इस ग्राफ़ में समय X-अक्ष पर तथा वेग Y-अक्ष पर होता है। एकसमान वेग में यह ग्राफ़ समय अक्ष के समांतर सरल रेखा होती है। एकसमान त्वरण में यह झुकी हुई सरल रेखा होती है। वेग-समय ग्राफ़ की ढाल त्वरण तथा ग्राफ़ और समय अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल विस्थापन के बराबर होता है।
| गुण | दूरी | विस्थापन |
|---|---|---|
| परिभाषा | पथ की कुल लंबाई | प्रारंभिक से अंतिम स्थिति की सबसे छोटी दूरी |
| राशि का प्रकार | अदिश | सदिश |
| चिह्न | सदैव धनात्मक | धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य |
| पथ पर निर्भरता | निर्भर | स्वतंत्र |
| चक्कर के बाद | धनात्मक | शून्य हो सकता है |
| गुण | चाल | वेग |
|---|---|---|
| परिभाषा | दूरी ÷ समय | विस्थापन ÷ समय |
| राशि का प्रकार | अदिश | सदिश |
| शून्य होना | कभी नहीं | संभव (वापस आने पर) |
| इकाई | m/s | m/s |
| समीकरण | संबंध |
|---|---|
| v = u + at | वेग-समय |
| s = ut + (1/2)at² | विस्थापन-समय |
| v² = u² + 2as | वेग-विस्थापन |
इस अध्याय में हमने सीखा कि गति सापेक्ष अवधारणा है तथा इसे दूरी, विस्थापन, चाल, वेग और त्वरण जैसी राशियों द्वारा वर्णित किया जाता है। दूरी पथ की कुल लंबाई है (अदिश), जबकि विस्थापन प्रारंभिक से अंतिम स्थिति की सबसे छोटी दूरी है (सदिश)। चाल दूरी के परिवर्तन की दर है तथा वेग विस्थापन के परिवर्तन की दर है। त्वरण वेग के परिवर्तन की दर है, जिसकी इकाई m/s² है। एकसमान त्वरण की गति के लिए तीन समीकरण — v = u + at, s = ut + ½at² तथा v² = u² + 2as — उपयोग में लाए जाते हैं। गति को ग्राफ़ों द्वारा भी दर्शाया जाता है; दूरी-समय ग्राफ़ की ढाल चाल देती है तथा वेग-समय ग्राफ़ की ढाल त्वरण और क्षेत्रफल विस्थापन देता है। गति की अवधारणा भौतिकी की नींव है और इसके बिना बल, कार्य, ऊर्जा तथा गुरुत्वाकर्षण जैसे विषयों को समझना संभव नहीं है।