प्राचीन काल में वैज्ञानिकों का मानना था कि परमाणु अविभाज्य है, परंतु आधुनिक खोजों ने यह सिद्ध कर दिया है कि परमाणु स्वयं तीन मूलभूत कणों — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन — से मिलकर बना होता है। जे. जे. थॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज की, रदरफ़ोर्ड ने परमाणु नाभिक की खोज की तथा चाडविक ने न्यूट्रॉन की खोज की। इस अध्याय में हम इन खोजों, विभिन्न परमाणु मॉडलों, परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या तथा समस्थानिकों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
परमाणु की संरचना को समझना आवश्यक है क्योंकि किसी तत्व के रासायनिक गुणधर्म उसके परमाणु की संरचना पर निर्भर करते हैं। किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा उनकी व्यवस्था ही निर्धारित करती है कि वह तत्व दूसरे तत्वों के साथ कैसे अभिक्रिया करेगा। परमाणु का केंद्र, जिसे नाभिक कहते हैं, धनावेशित प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से बना होता है, और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में घूमते रहते हैं।
इस अध्याय के अंत तक हम परमाणु क्रमांक (Atomic Number) और द्रव्यमान संख्या (Mass Number) की अवधारणा, समस्थानिक (Isotopes) और समभारिक (Isobars) का अंतर, इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था तथा आयनों की संरचना को भली-भाँति समझ लेंगे। यह ज्ञान आवर्त सारणी, रासायनिक आबंधों तथा परमाणु ऊर्जा को समझने की नींव है।
परमाणु तीन प्रकार के मूलभूत कणों से मिलकर बना होता है:
इलेक्ट्रॉन (Electron): इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण है। जे. जे. थॉमसन ने सन् 1897 में कैथोड किरणों के अध्ययन से इलेक्ट्रॉन की खोज की। इलेक्ट्रॉन का आवेश -1.6 × 10^-19 कूलॉम तथा द्रव्यमान लगभग 9.1 × 10^-31 kg होता है, जो प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग 1/1837वाँ भाग है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में घूमते हैं।
प्रोटॉन (Proton): प्रोटॉन धनावेशित कण है। इसका आवेश +1.6 × 10^-19 कूलॉम तथा द्रव्यमान लगभग 1.6726 × 10^-27 kg होता है। प्रोटॉन परमाणु के नाभिक में स्थित होता है। किसी तत्व के परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या ही उस तत्व की पहचान निर्धारित करती है।
न्यूट्रॉन (Neutron): न्यूट्रॉन अनावेशित (उदासीन) कण है। चाडविक ने सन् 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की। इसका द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर (1.675 × 10^-27 kg) होता है। न्यूट्रॉन नाभिक में स्थित होता है तथा नाभिक को स्थिरता प्रदान करता है।
| कण | आवेश | द्रव्यमान (kg) | स्थान |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | -1.6 × 10^-19 C | 9.1 × 10^-31 | नाभिक के बाहर |
| प्रोटॉन | +1.6 × 10^-19 C | 1.6726 × 10^-27 | नाभिक में |
| न्यूट्रॉन | 0 | 1.675 × 10^-27 | नाभिक में |
परमाणु की संरचना को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने समय-समय पर विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए।
जे. जे. थॉमसन ने 1898 में प्रस्ताव रखा कि परमाणु एक गोलाकार धनावेशित पदार्थ है, जिसमें इलेक्ट्रॉन (ऋणावेश) इस प्रकार सन्निहित होते हैं, जैसे पुडिंग में किशमिश। इसलिए इसे किशमिश पुडिंग मॉडल भी कहते हैं। इस मॉडल के अनुसार परमाणु समग्रतः विद्युत उदासीन होता है, क्योंकि धनात्मक तथा ऋणात्मक आवेश परस्पर संतुलित होते हैं। यह मॉडल परमाणु की विद्युत उदासीनता की व्याख्या करता है, परंतु नाभिक की अवधारणा नहीं देता।
रदरफ़ोर्ड ने सन् 1911 में स्वर्ण पत्र (gold foil) पर अल्फा कणों की बमबारी का प्रयोग किया। इस प्रयोग में प्राप्त प्रेक्षणों से उन्होंने निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:
रदरफ़ोर्ड के मॉडल के अनुसार परमाणु का नाभिक धनावेशित होता है, जिसमें प्रोटॉन स्थित होते हैं, और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर तीव्र गति से घूमते हैं, जैसे ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसलिए इसे ग्रहीय मॉडल भी कहते हैं। परमाणु अधिकांशतः खाली होता है और नाभिक अत्यंत घना होता है। इस मॉडल की कमी यह है कि यह यह नहीं बता सकता कि घूमते हुए इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिरकर परमाणु को अस्थिर क्यों नहीं बना देते।
नील्स बोर ने सन् 1913 में परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं या कोशों (Shells) में घूमते हैं। इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर (Energy Levels) भी कहा जाता है। नाभिक से निकटतम कोश K, फिर L, M, N आदि कहलाते हैं। प्रत्येक कोश में इलेक्ट्रॉन की अधिकतम संख्या 2n² सूत्र द्वारा निर्धारित होती है, जहाँ n कोश की क्रम संख्या है। K कोश में अधिकतम 2, L में 8, M में 18 तथा N में 32 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। बोर मॉडल के अनुसार जब इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जाता है, तो ऊर्जा अवशोषित करता है, और उच्च से निम्न में आने पर ऊर्जा उत्सर्जित करता है।
किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों को विभिन्न कोशों में निश्चित नियमों के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है:
उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का परमाणु क्रमांक 11 है, अतः उसमें 11 इलेक्ट्रॉन होते हैं। K कोश में 2, L कोश में 8 तथा M कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होगा। इसे K, L, M में 2, 8, 1 के रूप में लिखा जाता है। क्लोरीन (Cl) का परमाणु क्रमांक 17 है, अतः उसमें 17 इलेक्ट्रॉन होंगे — K में 2, L में 8, M में 7। ऑक्सीजन (O) का परमाणु क्रमांक 8 है — K में 2, L में 6।
परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं। इन्हीं इलेक्ट्रॉनों की संख्या से किसी तत्व के रासायनिक गुणधर्म निर्धारित होते हैं। सोडियम का एक संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए यह अपना संयोजी इलेक्ट्रॉन दान करके Na⁺ बनाता है। क्लोरीन में सात संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनाता है। संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति निर्धारित करती है।
जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण या त्याग करता है, तो वह विद्युत आवेशित कण बन जाता है, जिसे आयन कहते हैं। इलेक्ट्रॉन त्यागने से धनायन (धनावेश) तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से ऋणायन (ऋणावेश) बनता है। उदाहरण के लिए, सोडियम परमाणु (Na) एक इलेक्ट्रॉन त्याग कर Na⁺ धनायन बनाता है। क्लोरीन परमाणु (Cl) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl⁻ ऋणायन बनाता है। कैल्शियम (Ca) दो इलेक्ट्रॉन त्याग कर Ca²⁺ बनाता है, और मैग्नीशियम (Mg) दो इलेक्ट्रॉन त्याग कर Mg²⁺ बनाता है। सोडियम आयन (Na⁺) में 10 इलेक्ट्रॉन तथा 11 प्रोटॉन होते हैं, जबकि सोडियम परमाणु में 11 इलेक्ट्रॉन तथा 11 प्रोटॉन होते हैं। क्लोरीन आयन (Cl⁻) में 18 इलेक्ट्रॉन तथा 17 प्रोटॉन होते हैं।
परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z): किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु क्रमांक कहते हैं। किसी उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। इसलिए परमाणु क्रमांक प्रोटॉनों की संख्या या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होता है। हाइड्रोजन का परमाणु क्रमांक 1, हीलियम का 2, कार्बन का 6, नाइट्रोजन का 7, ऑक्सीजन का 8, सोडियम का 11 तथा क्लोरीन का 17 होता है। प्रत्येक तत्व का परमाणु क्रमांक अद्वितीय होता है।
द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की कुल संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते हैं।
द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या (A = Z + N)
न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या − परमाणु क्रमांक। उदाहरण के लिए, सोडियम परमाणु की द्रव्यमान संख्या 23 तथा परमाणु क्रमांक 11 है, अतः न्यूट्रॉनों की संख्या = 23 − 11 = 12। कार्बन की द्रव्यमान संख्या 12 तथा परमाणु क्रमांक 6 है, अतः न्यूट्रॉन = 12 − 6 = 6। किसी तत्व का प्रतिनिधित्व प्रतीक के रूप में निम्न प्रकार किया जाता है:
^A_Z X — जहाँ X तत्व का प्रतीक, A द्रव्यमान संख्या तथा Z परमाणु क्रमांक है। उदाहरण — सोडियम ^23_11Na, कार्बन ^12_6C, ऑक्सीजन ^16_8O।
समस्थानिक (Isotopes): वे परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक समान होते हैं, परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, समस्थानिक कहलाते हैं। समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान, परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, कार्बन के तीन समस्थानिक हैं — कार्बन-12 (^12_6C), कार्बन-13 (^13_6C) तथा कार्बन-14 (^14_6C)। हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं — प्रोटियम (^1_1H), ड्यूटेरियम (^2_1H) तथा ट्राइटियम (^3_1H)। क्लोरीन के दो समस्थानिक हैं — क्लोरीन-35 (^35_17Cl) तथा क्लोरीन-37 (^37_17Cl)।
समस्थानिकों के रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं, क्योंकि इनमें प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) समान होती है। परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न होने से इनके भौतिक गुणधर्म (द्रव्यमान, घनत्व) भिन्न होते हैं। समस्थानिकों के व्यावहारिक उपयोग होते हैं:
समभारिक (Isobars): वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं, समभारिक कहलाते हैं। समभारिकों में प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की कुल संख्या समान होती है। उदाहरण — कैल्शियम-40 (^40_20Ca) तथा आर्गन-40 (^40_18Ar) समभारिक हैं; दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है, परंतु परमाणु क्रमांक क्रमशः 20 और 18 हैं। समभारिकों के रासायनिक गुणधर्म भिन्न होते हैं क्योंकि उनके परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं।
| कण | आवेश | द्रव्यमान (kg) | खोजकर्ता |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | -1.6 × 10^-19 C | 9.1 × 10^-31 | जे. जे. थॉमसन |
| प्रोटॉन | +1.6 × 10^-19 C | 1.6726 × 10^-27 | रदरफ़ोर्ड |
| न्यूट्रॉन | 0 | 1.675 × 10^-27 | चाडविक |
| तत्व | परमाणु क्रमांक | K | L | M | संयोजी इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|---|---|---|
| हाइड्रोजन | 1 | 1 | — | — | 1 |
| ऑक्सीजन | 8 | 2 | 6 | — | 6 |
| सोडियम | 11 | 2 | 8 | 1 | 1 |
| क्लोरीन | 17 | 2 | 8 | 7 | 7 |
| गुण | समस्थानिक | समभारिक |
|---|---|---|
| परमाणु क्रमांक | समान | भिन्न |
| द्रव्यमान संख्या | भिन्न | समान |
| रासायनिक गुण | समान | भिन्न |
| उदाहरण | ^12_6C, ^14_6C | ^40_20Ca, ^40_18Ar |
इस अध्याय में हमने सीखा कि परमाणु अविभाज्य नहीं है, बल्कि तीन मूलभूत कणों — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन — से मिलकर बना होता है। इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित, प्रोटॉन धनावेशित तथा न्यूट्रॉन अनावेशित होता है। थॉमसन के पुडिंग मॉडल, रदरफ़ोर्ड के नाभिक मॉडल तथा बोर के कोश मॉडल ने परमाणु की संरचना को क्रमशः स्पष्ट किया। रदरफ़ोर्ड के प्रयोग से यह सिद्ध हुआ कि परमाणु अधिकांशतः खाली होता है तथा धनावेश सूक्ष्म नाभिक में केंद्रित होता है। बोर मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित कोशों में घूमते हैं तथा प्रत्येक कोश में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। परमाणु क्रमांक प्रोटॉनों की संख्या है, जबकि द्रव्यमान संख्या प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों का योग है। सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं, जो रासायनिक गुणधर्म निर्धारित करते हैं। समस्थानिकों में परमाणु क्रमांक समान तथा द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, जबकि समभारिकों में विपरीत स्थिति होती है। समस्थानिकों के अनेक व्यावहारिक उपयोग हैं, जैसे यूरेनियम-235 का परमाणु रिएक्टर में उपयोग तथा कार्बन-14 का पुरातत्व में आयु निर्धारण। यह अध्याय आवर्त सारणी तथा रासायनिक आबंधों के अध्ययन का आधार है।