कभी-कभी हमारा शरीर ठीक से कार्य नहीं करता — बुखार आ जाता है, सिर दर्द होता है या पेट में परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में हम कहते हैं कि हम बीमार हैं। परंतु क्या हमने सोचा है कि हम बीमार क्यों होते हैं? रोग किस प्रकार होते हैं तथा उन्हें कैसे रोका जा सकता है? इस अध्याय में हम रोग की अवधारणा, रोगों के प्रकार, संक्रामक रोगों के कारक, रोग संचरण की विधियाँ तथा रोगों से बचाव के उपायों का अध्ययन करेंगे।
स्वास्थ्य (Health): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से पूर्णतः सुस्थ रहने की अवस्था है, न कि केवल रोग या दुर्बलता का अभाव। स्वास्थ्य कई कारकों पर निर्भर करता है — पर्याप्त पोषक भोजन, स्वच्छ जल, स्वच्छ वातावरण, आनुवंशिकता, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति तथा चिकित्सा सुविधाएँ। स्वास्थ्य व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति ही समाज के विकास में योगदान दे सकता है।
रोग (Disease): किसी जीव की सामान्य अवस्था में होने वाला अव्यवस्था (disturbance) जिसके कारण उसके अंगों, ऊतकों या कोशिकाओं का कार्य बाधित होता है, रोग या बीमारी कहलाता है। रोग एक जटिल अवधारणा है, क्योंकि इसके कारण (एटियोलॉजी), लक्षण तथा प्रभाव अलग-अलग होते हैं। रोगों का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक यह पहचान करते हैं कि रोग किस कारण से होता है, कैसे फैलता है तथा किस प्रकार नियंत्रित किया जा सकता है। इस अध्याय में हम रोगों का व्यवस्थित अध्ययन करेंगे।
स्वास्थ्य और रोग एक-दूसरे से जुड़े हैं। स्वस्थ रहने के लिए शरीर के सभी अंगों का समुचित कार्य करना आवश्यक है। रोग होने पर शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित होती है। रोग को समझने के लिए तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
रोगों के कुछ सामान्य लक्षण — बुखार, सिर दर्द, खाँसी, थकान, भूख न लगना तथा शरीर में दर्द। परंतु सभी रोगों में सभी लक्षण नहीं होते; लक्षण रोग के प्रकार पर निर्भर करते हैं। रोग के लक्षण उसकी जटिलता के कारण बदल सकते हैं।
रोगों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है।
संक्रामक रोग (Infectious Diseases): वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं। ये रोग जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ जैसे रोगजनकों (Pathogens) द्वारा होते हैं। उदाहरण — फ्लू (इन्फ्लुएंज़ा), टाइफ़ॉइड, हैज़ा, मलेरिया, तपेदिक (TB), खसरा। ये रोग संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से, दूषित जल या भोजन से, वायु से या कीटों के काटने से फैलते हैं।
असंक्रामक रोग (Non-infectious Diseases): वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते, असंक्रामक रोग कहलाते हैं। ये रोग रोगजनकों द्वारा नहीं होते। ये निम्नलिखित कारणों से होते हैं:
तीव्र रोग (Acute Disease): वे रोग जो अचानक होते हैं तथा थोड़े समय (कुछ दिन) तक रहते हैं, तीव्र रोग कहलाते हैं। उदाहरण — सामान्य जुकाम, मलेरिया का दौरा, टाइफ़ॉइड। ये रोग उचित उपचार से ठीक हो जाते हैं।
जीर्ण रोग (Chronic Disease): वे रोग जो लंबे समय (महीनों या वर्षों) तक रहते हैं, जीर्ण रोग कहलाते हैं। उदाहरण — तपेदिक, मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग। जीर्ण रोग शरीर की कार्यक्षमता पर दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं।
संक्रामक रोग विभिन्न प्रकार के रोगजनकों (Pathogens) द्वारा होते हैं:
विषाणु (Viruses): विषाणु सबसे छोटे रोगजनक हैं। ये केवल जीवित कोशिकाओं के अंदर प्रजनन करते हैं। इनसे होने वाले रोग — फ्लू, खसरा, चेचक, रेबीज़, एड्स, हेपेटाइटिस। विषाणु रोगों के लिए एंटीबायोटिक्स प्रभावी नहीं होते।
जीवाणु (Bacteria): जीवाणु एककोशिकीय सूक्ष्मजीव हैं। इनसे होने वाले रोग — हैज़ा, टाइफ़ॉइड, तपेदिक, निमोनिया, टिटनेस, पेचिश। जीवाणु रोगों का उपचार एंटीबायोटिक्स द्वारा होता है।
कवक (Fungi): कवक से होने वाले रोग — दाद (Ringworm), खाज। ये त्वचा रोग होते हैं।
प्रोटोज़ोआ (Protozoa): प्रोटोज़ोआ से होने वाले रोग — मलेरिया (प्लाज़्मोडियम), अमीबी पेचिश (एंटअमीबा), निद्रा रोग।
हेल्मिंथ (कृमि): कृमि से होने वाले रोग — एस्केरिएसिस (गोल कृमि), पेचिश (फीता कृमि), एलिफेंटियासिस।
| रोगजनक | रोग | उपचार/नियंत्रण |
|---|---|---|
| विषाणु | फ्लू, एड्स, खसरा | टीका; एंटीबायोटिक्स प्रभावी नहीं |
| जीवाणु | हैज़ा, टाइफ़ॉइड, TB | एंटीबायोटिक्स |
| कवक | दाद | कवकरोधी औषधियाँ |
| प्रोटोज़ोआ | मलेरिया, पेचिश | मलेरियारोधी औषधियाँ |
| कृमि | एस्केरिएसिस | कृमिनाशक औषधियाँ |
संक्रामक रोगों के मुख्य स्रोत हैं — संक्रमित व्यक्ति, संक्रमित जन्तु, दूषित जल तथा भोजन, तथा दूषित वस्तुएँ। जो व्यक्ति रोगजनक को धारण करता है परंतु स्वयं बीमार नहीं दिखता, उसे वाहक (Carrier) कहते हैं। रोग संचरण की मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:
वायु द्वारा: खाँसने या छींकने पर रोगजनक युक्त बूँदें वायु में फैलती हैं। फ्लू, खसरा, तपेदिक इसी प्रकार फैलते हैं।
जल तथा भोजन द्वारा: दूषित जल या भोजन से रोगजनक शरीर में प्रवेश करते हैं। हैज़ा, टाइफ़ॉइड, अमीबी पेचिश इसी प्रकार फैलते हैं।
कीट वाहक द्वारा (Vector Transmission): कुछ रोग कीटों (वाहक) द्वारा फैलते हैं। मच्छर मलेरिया (मादा एनोफ़िलीज़), डेंगू तथा चिकनगुनिया (एडीज़ मच्छर) के वाहक हैं। इन्हें जन्तुजनित रोग भी कहते हैं।
रक्त तथा शरीर के तरल पदार्थों द्वारा: एड्स, हेपेटाइटिस बी एवं सी संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध तथा सुई के साझा उपयोग से फैलते हैं।
संपर्क द्वारा: छूत से त्वचा रोग (दाद, खाज) फैलते हैं।
संक्रामक रोगों से बचाव के दो मुख्य तरीके हैं — सामान्य रूप से रोगजनक के संपर्क को रोकना तथा विशिष्ट प्रतिरक्षा (टीकाकरण)।
टीकाकरण (Vaccination) रोगों से बचाव की सबसे प्रभावी विधि है। टीके में कमजोर या मृत रोगजनक होते हैं, जो शरीर में प्रवेश करने पर रोग नहीं उत्पन्न करते, परंतु प्रतिरक्षा तंत्र को उत्तेजित करते हैं। शरीर में एंटीबॉडी (Antibodies) बनते हैं, जो भविष्य में उसी रोगजनक के आक्रमण से रक्षा करते हैं। इस प्रक्रिया को प्रतिरक्षण (Immunization) कहते हैं। कुछ प्रमुख टीके — बीसीजी (तपेदिक), पोलियो का टीका, खसरा-कण्ठमाला-रूबेला (MMR), डीपीटी (डिप्थीरिया-कुकुर खाँसी-टिटनेस), हेपेटाइटिस बी का टीका। टीकाकरण से चेचक जैसे रोग पूरी तरह समाप्त किए जा चुके हैं तथा पोलियो को भी समाप्त करने में सफलता मिली है।
एंटीबायोटिक्स (Antibiotics): जीवाणु रोगों के उपचार में एंटीबायोटिक्स (जैसे पेनिसिलिन) उपयोग होते हैं। परंतु एंटीबायोटिक्स विषाणु रोगों (जैसे फ्लू, सामान्य जुकाम) पर प्रभावी नहीं होते, क्योंकि विषाणु जीवित कोशिकाओं के अंदर प्रजनन करते हैं।
| प्रकार | आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| संक्रामक | रोगजनक से फैलता है | फ्लू, टाइफ़ॉइड |
| असंक्रामक | नहीं फैलता | मधुमेह, कैंसर |
| तीव्र | थोड़े समय | जुकाम |
| जीर्ण | लंबे समय | तपेदिक |
| रोगजनक | प्रमुख रोग |
|---|---|
| विषाणु | फ्लू, एड्स, खसरा |
| जीवाणु | हैज़ा, टाइफ़ॉइड, TB |
| प्रोटोज़ोआ | मलेरिया, अमीबी पेचिश |
| कवक | दाद |
| विधि | उदाहरण रोग |
|---|---|
| वायु | फ्लू, खसरा, TB |
| जल-भोजन | हैज़ा, टाइफ़ॉइड |
| कीट वाहक | मलेरिया, डेंगू |
| रक्त/तरल | एड्स, हेपेटाइटिस |
इस अध्याय में हमने सीखा कि स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक सुस्थिति की समग्र अवस्था है। रोग शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली का अव्यवस्था है। रोग दो प्रकार के होते हैं — संक्रामक रोग, जो विषाणु, जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ तथा कृमि जैसे रोगजनकों से फैलते हैं, तथा असंक्रामक रोग, जो आनुवंशिक, पोषण संबंधी या जीवनशैली के कारण होते हैं। रोग तीव्र (थोड़े समय) या जीर्ण (लंबे समय) हो सकते हैं। संक्रामक रोग वायु, जल-भोजन, कीट वाहक तथा रक्त-तरल पदार्थों के माध्यम से फैलते हैं। मलेरिया मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर तथा डेंगू एडीज़ मच्छर द्वारा फैलता है। रोगों से बचाव के लिए स्वच्छता, वाहक नियंत्रण तथा टीकाकरण आवश्यक हैं। टीकाकरण प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ़ बनाता है तथा एंटीबॉडी उत्पन्न करता है। जीवाणु रोगों का उपचार एंटीबायोटिक्स द्वारा होता है, जबकि विषाणु रोगों में टीकाकरण ही प्रभावी है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार तथा स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य की रक्षा के मूल स्तंभ हैं।