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1. परिचय

जब हम कोई बल लगाकर वस्तु को विस्थापित करते हैं, तो हमने कार्य किया है। बोझ उठाना, साइकिल चलाना, वस्तु को खींचना या धकेलना — ये सभी कार्य हैं। परंतु भौतिकी में कार्य (Work) की परिभाषा दैनिक जीवन से भिन्न होती है। कार्य केवल तब होता है, जब लगाया गया बल वस्तु में विस्थापन उत्पन्न करे। इस अध्याय में हम कार्य, शक्ति और ऊर्जा की अवधारणा, ऊर्जा के विभिन्न रूप, कार्य-ऊर्जा प्रमेय तथा ऊर्जा संरक्षण के नियम का अध्ययन करेंगे।

कार्य (Work): जब किसी वस्तु पर बल लगाने से वह बल की दिशा में विस्थापित होती है, तो कहा जाता है कि बल ने कार्य किया। कार्य बल तथा विस्थापन का गुणनफल होता है। यदि वस्तु पर बल लगाने पर विस्थापन नहीं होता, तो कार्य शून्य होता है। उदाहरण के लिए, दीवार को ज़ोर से धकेलने पर यदि दीवार हिलती नहीं, तो कार्य नहीं हुआ, यद्यपि हमने बल लगाया। कार्य की SI इकाई जूल (Joule, J) है।

ऊर्जा (Energy): ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है। जिस वस्तु में जितनी अधिक ऊर्जा होती है, वह उतना ही अधिक कार्य कर सकती है। ऊर्जा की SI इकाई भी जूल है। ऊर्जा के अनेक रूप होते हैं — गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, प्रकाश ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा। ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन होता रहता है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।

शक्ति (Power): कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। शक्ति = कार्य ÷ समय। शक्ति की SI इकाई वाट (Watt, W) है। जो यंत्र कम समय में अधिक कार्य करता है, उसकी शक्ति अधिक होती है। इस अध्याय में हम इन सभी अवधारणाओं को सूत्रों तथा उदाहरणों सहित विस्तार से समझेंगे।

2. कार्य (Work) — परिभाषा एवं गणना

भौतिकी में कार्य की परिभाषा है — जब किसी वस्तु पर बल लगाने से वस्तु बल की दिशा में विस्थापित होती है, तो बल द्वारा किया गया कार्य बल तथा विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है।

कार्य = बल × विस्थापन

W = F × s

जहाँ F बल (न्यूटन में) तथा s विस्थापन (मीटर में) है। कार्य की SI इकाई जूल है। 1 जूल वह कार्य है जो 1 न्यूटन बल लगाकर किसी वस्तु को 1 मीटर विस्थापित करने पर किया जाता है। 1 J = 1 N × 1 m।

कार्य की शर्तें:

  1. वस्तु पर बल लगना चाहिए।
  2. बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन होना चाहिए।
  3. यदि बल और विस्थापन दोनों शून्य हों या कोई एक शून्य हो, तो कार्य शून्य होता है।

कार्य के शून्य होने की स्थितियाँ

  1. यदि वस्तु पर बल लगाया जाए परंतु विस्थापन न हो (जैसे दीवार को धकेलना), तो कार्य शून्य होता है।
  2. यदि विस्थापन बल के लंबवत दिशा में हो (जैसे जमीन के ऊपर झोला लेकर चलना), तो कार्य शून्य होता है।
  3. यदि बल शून्य हो, तो कार्य शून्य होता है।
  4. वृत्तीय गति में केंद्र की ओर लगने वाला अभिकेंद्र बल कार्य नहीं करता, क्योंकि वह विस्थापन के लंबवत होता है।

कार्य धनात्मक या ऋणात्मक: यदि बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों, तो कार्य धनात्मक होता है। यदि बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हों, तो कार्य ऋणात्मक होता है। उदाहरण के लिए, पिंड को ऊपर उठाने पर गुरुत्वाकर्षण बल ने ऋणात्मक कार्य किया।

3. ऊर्जा और उसके रूप (Energy and its Forms)

ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है। किसी वस्तु की ऊर्जा वह कुल कार्य है, जो वह वस्तु कर सकती है। ऊर्जा की SI इकाई जूल है। ऊर्जा के प्रमुख रूप निम्नलिखित हैं:

  1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy): किसी वस्तु की गति के कारण उसमें निहित ऊर्जा गतिज ऊर्जा कहलाती है। गतिशील वस्तु में गतिज ऊर्जा होती है। उदाहरण — चलती गाड़ी, बहता पानी, चलती हवा (पवन ऊर्जा)।

  2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy): किसी वस्तु की स्थिति, आकार या आकृति के कारण उसमें संचित ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। उदाहरण — ऊँचाई पर रखी गई वस्तु, बंधा हुआ स्प्रिंग, आरोपित धनुष की डोरी।

  3. ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy): पदार्थ के कणों की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा। आग, सूर्य से उष्मा प्राप्त होती है।

  4. प्रकाश ऊर्जा (Light Energy): प्रकाश के रूप में संचारित होने वाली ऊर्जा। सूर्य, बल्ब प्रकाश ऊर्जा देते हैं।

  5. ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy): ध्वनि तरंगों के रूप में ऊर्जा। माइक्रोफोन, लाउडस्पीकर में ध्वनि ऊर्जा।

  6. रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy): खाद्य पदार्थों, बैटरी, ईंधन में संग्रहीत ऊर्जा।

  7. विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy): इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से उत्पन्न ऊर्जा।

  8. परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy): नाभिकीय संलयन तथा विखंडन से प्राप्त ऊर्जा।

4. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

किसी गतिशील वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा होती है, उसे गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) कहते हैं। गतिज ऊर्जा वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग दोनों पर निर्भर करती है।

यदि m द्रव्यमान की वस्तु का वेग v हो, तो उसकी गतिज ऊर्जा:

KE = (1/2) × m × v²

गतिज ऊर्जा का SI मात्रक जूल है। गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है। यदि वेग दुगुना हो जाए, तो गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है। इसीलिए बहुत तेज़ चलने वाले वाहनों में रुकने की दूरी बहुत बड़ी होती है।

उदाहरण: यदि 4 kg द्रव्यमान की वस्तु 5 m/s के वेग से चलती है, तो KE = (1/2) × 4 × 25 = 50 J होगी।

कार्य-ऊर्जा प्रमेय

कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।

कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन = (1/2)mv² − (1/2)mu²

5. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

किसी वस्तु की स्थिति, आकार या आकृति के कारण उसमें संचित ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। ऊँचाई पर रखी गई वस्तु में उसकी ऊँचाई के कारण गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होती है।

यदि m द्रव्यमान की वस्तु को पृथ्वी तल से h ऊँचाई तक उठाया जाए, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा:

PE = m × g × h

जहाँ g गुरुत्वीय त्वरण है। इस सूत्र का अर्थ है कि वस्तु को h ऊँचाई तक उठाने में mgh के बराबर कार्य करना पड़ता है, जो उसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संग्रहीत हो जाता है। ऊँचाई अधिक होने पर स्थितिज ऊर्जा अधिक होती है। छत से लटकती हुई वस्तु, बाँधों में संग्रहीत जल तथा सिकुड़ा हुआ स्प्रिंग स्थितिज ऊर्जा के उदाहरण हैं।

6. ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Energy)

ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार — "ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।"

उदाहरण के लिए, किसी ऊँचाई से गिरती हुई गेंद में कुल ऊर्जा (गतिज + स्थितिज) हर बिंदु पर स्थिर रहती है। जब गेंद ऊपर होती है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम तथा गतिज ऊर्जा शून्य होती है। गिरते समय स्थितिज ऊर्जा घटती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है। जमीन पर पहुँचने पर स्थितिज ऊर्जा शून्य तथा गतिज ऊर्जा अधिकतम हो जाती है। किसी भी बिंदु पर कुल ऊर्जा (KE + PE) समान रहती है।

ऊर्जा के रूपांतरण के कुछ उदाहरण:

  1. सूर्य की प्रकाश ऊर्जा → प्रकाश संश्लेषण में रासायनिक ऊर्जा।
  2. जल विद्युत में स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा।
  3. पवन ऊर्जा (गतिज) → विद्युत ऊर्जा।
  4. खाद्य पदार्थों की रासायनिक ऊर्जा → शरीर की गतिज ऊर्जा तथा ऊष्मा।
  5. पत्थर ऊँचाई से गिरने पर स्थितिज → गतिज → ऊष्मा (जमीन से टकराने पर)।

7. शक्ति (Power)

किसी एजेंट द्वारा कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। यदि W कार्य t समय में किया जाता है, तो:

शक्ति = कार्य ÷ समय

P = W / t

शक्ति की SI इकाई वाट (W) है। 1 वाट = 1 जूल/सेकंड। बड़े मात्रकों में शक्ति को किलोवाट (kW) या मेगावाट (MW) में मापा जाता है। 1 kW = 1000 W। विद्युत यंत्रों की शक्ति को अश्वशक्ति (Horse Power, HP) में भी मापा जाता है; 1 HP = 746 W।

उदाहरण: यदि कोई मशीन 20 सेकंड में 1000 जूल कार्य करती है, तो उसकी शक्ति P = 1000 ÷ 20 = 50 W होगी।

ऊर्जा की बड़ी इकाई — किलोवाट घंटा (kWh)

ऊर्जा की व्यावहारिक इकाई किलोवाट घंटा (kWh) है, जिसे यूनिट भी कहते हैं। विद्युत बिल में ऊर्जा को kWh में मापा जाता है। 1 kWh ऊर्जा वह है जो 1 किलोवाट शक्ति का यंत्र 1 घंटे में व्यय करता है।

1 kWh = 1 kW × 1 h = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 10^6 J

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: कार्य के प्रकार

स्थिति कार्य
बल व विस्थापन समान दिशा धनात्मक कार्य
बल व विस्थापन विपरीत दिशा ऋणात्मक कार्य
विस्थापन नहीं शून्य कार्य
बल ⊥ विस्थापन शून्य कार्य

तालिका 2: ऊर्जा के रूप

ऊर्जा का रूप कारण उदाहरण
गतिज ऊर्जा गति चलती गाड़ी
स्थितिज ऊर्जा स्थिति/आकृति ऊँचाई पर वस्तु
रासायनिक ऊर्जा बंधों में बैटरी, खाद्य
परमाणु ऊर्जा नाभिक परमाणु रिएक्टर

तालिका 3: महत्वपूर्ण सूत्र

राशि सूत्र SI इकाई
कार्य W = F × s जूल (J)
गतिज ऊर्जा KE = ½mv² जूल (J)
स्थितिज ऊर्जा PE = mgh जूल (J)
शक्ति P = W/t वाट (W)

माइंड मैप

graph TD A["कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा"] --> B["कार्य W = F × s"] B --> B1["इकाई: जूल"] B --> B2["बल + विस्थापन आवश्यक"] A --> C["ऊर्जा"] C --> C1["गतिज ऊर्जा = ½mv²"] C --> C2["स्थितिज ऊर्जा = mgh"] C --> C3["ऊर्जा संरक्षण"] A --> D["शक्ति P = W/t"] D --> D1["इकाई: वाट"] D --> D2["1 kWh = 3.6 × 10^6 J"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: कार्य और शक्ति

कार्य और शक्ति बल F (न्यूटन) विस्थापन s (मीटर) कार्य = F × s 1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर दीवार धकेलना (विस्थापन नहीं) → कार्य शून्य शक्ति P = कार्य ÷ समय इकाई: वाट (J/s) 1 kWh = 3.6 × 10^6 J विद्युत बिल की इकाई उदाहरण: 1000 J कार्य 20 s में → P = 50 W 1 HP = 746 W स्वर्ण नियम कार्य बल और विस्थापन का गुणनफल है; विस्थापन के बिना कार्य शून्य होता है।

आरेख 2: ऊर्जा के रूप तथा ऊर्जा संरक्षण

ऊर्जा के रूप गतिज ऊर्जा ½mv² (गति से) स्थितिज ऊर्जा mgh (ऊँचाई से) रासायनिक ऊर्जा बैटरी, खाद्य विद्युत ऊर्जा इलेक्ट्रॉन प्रवाह परमाणु ऊर्जा नाभिकीय विखंडन प्रकाश/ऊष्मा/ध्वनि सूर्य, बल्ब ऊर्जा संरक्षण का नियम ऊर्जा न तो बनती है, न नष्ट होती है; केवल रूप बदलती है गिरती गेंद: ऊँचाई पर PE अधिकतम, जमीन पर KE अधिकतम कुल ऊर्जा (KE + PE) स्थिर रहती है पवन ऊर्जा → विद्युत | स्थितिज → गतिज → विद्युत (जल विद्युत) Golden Rule ऊर्जा का कुल योग सदैव संरक्षित रहता है; केवल उसका रूप बदलता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. कार्य की परिभाषा: दैनिक थकान को कार्य नहीं समझना चाहिए; भौतिकी में कार्य के लिए बल के साथ विस्थापन अनिवार्य है। दीवार को धकेलना कार्य नहीं है।
  2. कार्य शून्य की स्थितियाँ: बल लगाने पर भी विस्थापन न होने पर, या विस्थापन बल के लंबवत होने पर कार्य शून्य होता है। वृत्तीय गति में अभिकेंद्र बल कार्य नहीं करता।
  3. KE का वेग संबंध: गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है (KE = ½mv²); वेग दुगुना → ऊर्जा चार गुना, न कि दुगुना।
  4. PE का सूत्र: स्थितिज ऊर्जा mgh होती है, जहाँ g के बिना सूत्र अधूरा है। कई बार छात्र केवल mh लिख देते हैं।
  5. शक्ति और ऊर्जा में भ्रम: शक्ति कार्य करने की दर है (P = W/t), जबकि ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है। दोनों की इकाइयाँ (वाट बनाम जूल) भिन्न होती हैं।
  6. kWh इकाई: kWh ऊर्जा की इकाई है, शक्ति की नहीं। 1 kWh = 3.6 × 10^6 जूल, जो 1 kW शक्ति के यंत्र द्वारा 1 घंटे में व्यय ऊर्जा है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. कार्य की परिभाषा, सूत्र तथा कार्य शून्य होने की स्थितियाँ लिखने का अभ्यास करें; यह वर्णनात्मक प्रश्नों का प्रिय विषय है।
  2. गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा की व्युत्पत्ति (गति के समीकरणों से KE = ½mv²) लिखने का अभ्यास करें।
  3. संख्यात्मक प्रश्नों में सभी राशियों की इकाइयाँ पहले स्थापित करें (kg, m/s, m, N), फिर सूत्र में स्थानापन्न करें।
  4. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (कार्य = KE में परिवर्तन) तथा ऊर्जा संरक्षण के उदाहरण लिखने का अभ्यास करें।
  5. शक्ति के प्रश्नों में समय को सेकंड में बदलें (घंटे से सेकंड) तथा उत्तर में इकाई वाट या किलोवाट लिखें।
  6. 1 kWh = 3.6 × 10^6 J का रूपांतरण तथा ऊर्जा के विभिन्न रूपों के उदाहरण याद रखें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि भौतिकी में कार्य तब होता है, जब बल वस्तु को विस्थापित करे; कार्य = बल × विस्थापन, जिसकी इकाई जूल है। यदि विस्थापन नहीं होता या बल विस्थापन के लंबवत होता है, तो कार्य शून्य होता है। ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है, जिसके अनेक रूप हैं — गतिज, स्थितिज, रासायनिक, विद्युत, परमाणु, ऊष्मीय, प्रकाश तथा ध्वनि ऊर्जा। गतिज ऊर्जा (½mv²) गति के कारण तथा स्थितिज ऊर्जा (mgh) स्थिति के कारण उत्पन्न होती है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किया गया कार्य गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा न तो बनती है और न ही नष्ट होती है, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति कार्य करने की दर है (P = W/t), जिसकी इकाई वाट है, तथा व्यावहारिक इकाई किलोवाट घंटा (1 kWh = 3.6 × 10^6 J) है। ये अवधारणाएँ ऊर्जा उत्पादन, विद्युत उपयोग, यांत्रिक मशीनों तथा विज्ञान के अनेक क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।